गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

अष्ट विनायक, हस्तिमुख गजानन।

श्री पाण्डुरङ्ग वामन काणे ने धर्मशास्त्र का इतिहास भाग -1 पृष्ठ 186 पर स्पष्टीकरण लिखा है कि, अष्ट विनायक - 1 सम्मित, 2 उस्मित, 3 मित, 4 देवयजन, 5 शाल, 6 कटंकट, 7 कुष्माण्ड, और 8 राजपुत्र ये आठों पिशाच हैं और शिवगण हैं।
 विनायक मूलतः विघ्न डालते हैं, शंकर जी के समान ही गजानन ने भी अपने ही विवाह में एक हजार विघ्न उपस्थित किए थे। इस लिए भय वश इन्हें प्रथम निमन्त्रण देते हैं और भोग आदि देकर सन्तुष्ट करने का प्रयत्न किया जाता है। जैसे मोहल्ले के गुण्डे को भिया आपके घर का कार्यक्रम है, ध्यान रखिएगा कहकर चने के झाड़ पर चढ़ा देते हैं, तो वह प्रसन्न होकर विघ्न नहीं डालता है। बल्कि आस-पास के दुसरे मोहल्ले के गुण्डों से भी बचाता है।
वर्तमान में जिन्हें भूत-प्रेत समझा जाता है वस्तुतः वे पिशाच होते हैं, जो क्षणिक दृश्यमान और अदृश्य होते रहते हैं, बिमार कर देते हैं, शिकार व्यक्ति को आवेशित कर देते हैं, खून चूसते हैं, खाद्य या मदिरा आदि तथा बीड़ी, सिगरेट, गांजा आदि मांगते हैं, देने वाले पर प्रसन्न हो जाते हैं, बावड़ियों, इमली के पेड़ आदि पर निवास करते हैं। वेदों में इन्हें रक्षोहा कहा जाता है।

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