बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

भगवान श्रीकृष्ण ने बाढ़ग्रस्त ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत पर ग्वालबालों द्वारा निर्मित झोपड़ियों और वृक्षों पर बने मचानों पर सुरक्षित रखा था, न कि, पर्वत उखाड़कर वापर मैदान में सात दिन खड़े रखा था।

सामान्य तर्क है कि, यदि अत्यधिक वर्षा हो रही हो,  मकान टूट कर बह रहे हों तो आप निकटतम उँचे स्थान अर्थात टीले की ओर जाएँगे? 
या
किसी गुफा में छुपेँगे? गुफा में भी पानी भरने का खतरा रहता है।

ध्यान रखें ---
ग्वाल-बाल सदेव उँचे चरागाहों में अत्यधिक ठण्ड, गर्मी और तेज वर्षा ओला वृष्टि आदि से बचाव हेतु प्रायः झोपड़ियाँ, और वृक्षों पर मचान बनाकर रखते हैं। जहाँ से एक ही स्थान से आस-पास विचर रहे जंगली पशुओं का भी ध्यान रख कर अपने पशुओं की रक्षा करते हुए गाय-बेलों, साण्डों को सुरक्षित चरा सकें और अपने पशुओं पर भी दृष्टि रख सकें ताकि, पशु गुम नहीं जाए।

जब गांव में भयंकर बाढ़ आ जाती है, तब पर्वतीय उँचाई पर बनी झोपड़ियाँ और मचान ही सबसे सुरक्षित शरण स्थल होते हैं।
यदि आप काल्पनिक चमत्कारों के बजाय बुद्धि कौशल के समर्थक हैं तो आप मेरा आशय समझ सकते हैं।

योग कर्मसु कौशलम् समझाने वाले जगद्गुरु श्रीकृष्ण; जरासंध के बारम्बार आक्रमण से बचाव हेतु योजना बद्ध तरीके से पहले से ही राजधानी मथुरा से सुदूर द्वारका में बसाकर मथुरा वासियों को सुरक्षित करदेने वाले श्रीकृष्ण; अपने बुद्धि कौशल से बिना लड़े ही कालनेमी को महाराज मुचकन्द की दृष्टि में लाकर नष्ट करवा देने वाले चतुर शिरोमणि भगवान श्रीकृष्ण; अपने बुद्धि कौशल के बल पर भीम के हाथों जरासंध के दो टुकड़े करवा देने वाले बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण बाढ़ग्रस्त ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत उखाड़कर उसकी छतरी के नीचे सात दिन रात खड़े रहने को विवश करने का चमत्कार दिखलाएँगे, या ऐसा उपाय सुझाएँगे कि, गोवर्धन पर्वत पर बनी झोपड़ियों में, मचानों में ब्रजवासी पानी से भी सुरक्षित रह पाएँ और जीव-जन्तुओं से भी सुरक्षित रह पाएँ? और जो भविष्य में भी सबके लिए उपयोगी हो सके ऐसा उपाय बतलाएँगे?
या 
क्या भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण केवल चमत्कार बतलाने के लिए, केवल सिर गीला होने से बचाकर वापस बाढ़ में बहने का खतरा उत्पन्न कर ब्रज वासियों के सुरक्षा कवच गोवर्धन को भूमि से उखाड़कर, कर सपाट मैदान में खड़ा करके गोवर्धन पर्वत की छतरी बनाकर उस छतरी के नीचे सात दिन तक खड़ा रखेंगे?
सोचो बुद्धिमान सनातनियों बनकर बुद्धु बनकर बौद्धों द्वारा गलत समझाये गये चमत्करों के चक्कर में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण को जादुगर समझने की भूल मत करो।
इतिहास-पुराणों विकृत कर मतान्तरण की गहरी चाल समझो। प्राचीन पुराणों में कांट-छांट कर बनाइ गई अप्राकृतिक और असामान्य चमत्कारी घटनाओं के पीछे छुपी वास्तविक घटनाओं को समझों और समझाओ, ताकि, विधर्मियों के तर्कों का समुचित उत्तर न दे पाने के कारण उनके सामने शीष झुकाकर पराजय स्वीकार न करना पड़े। और परिणाम स्वरूप उनका मत स्वीकार न करना पड़े।
किसी वैज्ञानिक स्तर के सिविल इञ्जिनियर से गणना करना कर देखें कि;
ब्रज क्षेत्र में किसी एक किलोमीटर व्यास वाले गुम्मदाकार पर्वत का कम से कम भार कितना होगा?
इतने भारी पर्वत को बिना क्षति पहूँचाए भूतल से उखाड़ने के लिए कितना बल लगेगा?
फिर उस पर्वत के आधार वृत्त के केन्द्र तक पहूँच कर एक ही छड़ पर टिकाने, और टिकाए रखने का सन्तुलन बनाना और फिर पर्वत को बिना क्षरण के लगभग एक सप्ताह तक ऐसे ही टिकाए रखने हेतु सन्तुलन बनाए रखने के लिए कितना बल लगेगा?
फिर एक सप्ताह बाद उसके केन्द्र से सुरक्षित निकलने के लिए उसका एक सिरा झुकाकर, भूमि से टिकाकर धीरे धीरे आधा किलोमीटर चलकर सुरक्षित बाहर आने के लिए कितना बल लगेगा?
क्या ऐसा कर पाना सम्भव है भी?
ध्यान रखें गोवर्धन पर्वत के धरातल का व्यास लगभग आठ किलोमीटर है।

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