जबकि वे अपने मत पन्थ सम्प्रदाय के विषय में खुलेआम कहते हैं कि,
हम हिन्दू नहीं हैं।
म्यांमार और श्री लङ्का के थेरवादी बौद्ध भिक्षुओं के शिष्य भीमराव राणाजी सपकाल (अम्बेडकर) के द्वारा स्थापित नव बौद्ध सम्प्रदाय के अनुयाइयों की बाइस प्रतिज्ञाओं की जानकारी तो हो ही गई।
जैन मुर्तियों और चित्रों में भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी और शंकर जी जैन तीर्थंकरों पर चँलर डुलाते दिखाये जाते हैं।
रावण को अपना तीर्थंकर मानते हैं और उनकी रामचरिउ के अनुसार भगवान श्री रामचन्द्र जी और भगवान श्रीकृष्ण जी को सिन्हा करने के कारण नर्कवास मिला था।
बादमें जैन दीक्षा लेने पर उनका उद्धार हुआ।
आनन्दपुर साहब घोषणा के अनुसार खालसा पन्थ की स्थापना के साथ ही खालसा स्वयम् को हिन्दू नहीं मानते हैं। महाराज रणजीत सिंह जी की दृष्टि में हिन्दू मुस्लिम और वेद तथा कुरान समान आदरणीय ग्रन्थ थे।
लिङ्गायत पनृथ के संस्थापक का जन्म ब्राह्मण परिवार में ही हुआ था। लेकिन उन्होंने अपने उपदेशों में सदेव ब्राह्मणों के अछूत और सनातन धर्म के देवी-देवताओं के प्रति अपमान जनक बातें ही की।
वे लिङ्ग पूजक है और वीर शैव दर्वन को मानते हैं तथा केदारनाथ को तीर्थ मानते हें इसलिए सनातनी उन्हें शैव समझते हैं
जबकि शंकरजी को भी गालियाँ देते हैं।
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