शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

भगवत्कृपा

भगवान तो अकारण करुणाकरन, करुणाकरनिधि हैं।
 वे श्रद्धालु या घ्रणा करने वाले, प्रेमी भक्त और द्वेषी- वेर पालने वाले का भेद ध्यान नहीं रखते। सबपर समान कृपा करते हैं।
लेकिन सभी अपनी-अपनी पात्रतानुसार प्राप्त कर पाते हैं।
इसी प्रकार 
भगवान विष्णु की माया, भगवान प्रभविष्णु की श्री लक्ष्मी और भगवान नारायण श्रीहरि की गज सेवित कमलासना नारायणी पद्मा देवी की कृपा तो सबपर समान रूप से रहती है, लेकिन सभी अपनी-अपनी योग्यता, निष्ठा, कर्मठता और पात्रतानुसार प्राप्त कर पाते हैं।

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