गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

नक्षत्रिय राशि-नक्षत्र और सायन प्रधि।

भूमी द्वारा सूर्य के परिभ्रमण पथ क्रान्तिवृत के उत्तर-दक्षिण में आठ-नौं अंश की पट्टी में कुछ ताराओं के तारामण्डल से निर्मित एक विशेष आकृति को नक्षत्र कहते हैं।
यही स्थिति बारह राशियों की भी है।
गलती वराहमिहिर के समय हुई कि, क्रान्तिवृत में या विषुव वृत में तीस-तीस अंश की सायन प्रधि को राशि मान लिया गया। और तीस-तीस अंश की राशियों में नक्षत्रों को समायोजित करने के लिए 800'- 800' कला (13°20') के नक्षत्र बना दिये गए।
मूलतः न राशियाँ एक समान 30° भोगांश की है न ही वैदिक नक्षत्र 800'- 800' कला (13°20') के थे।
इसलिए इस नये राशि नक्षत्र का कोई स्वभाव मानने का कोई आधार नहीं है। चित्रा नक्षत्र तो मात्र 01° से भी कम क्षेत्र का है।
इस लिए नक्षत्र चरण यानी नवांश और कृष्ण मुर्ति पद्धति के उप नक्षत्र (सब लॉर्ड) और उप-उप नक्षत्र (सब सब लॉर्ड) भी बेमतलब हैं।

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