रविवार, 14 सितंबर 2025

क्या ब्राह्मण ग्रन्थों को श्रुति या वेद कहना उचित है?

क्या ब्राह्मण ग्रन्थों को श्रुति या वेद कहना उचित है?
किसी से भी पुछो कि, वेद कितने हैं तो चार ही कहेगा।
नाम पूछो तो ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद ही कहेगा।
अन्य किसी ब्राह्मण ग्रन्थ को वेद नाम से नहीं पुकारेगा।
जैसे वेद त्रयी या त्रयी विद्या शब्द का अर्थ पद्य, गद्य और गान योग्य वेद है, अथर्ववेद सहित सभी मन्त्र संहिताओं के नाम ऋग्वेद में भी मिलते हैं।  
ब्राह्मण ग्रन्थ मन्त्र संहिताओं की व्याख्या (भाष्य) है, इसलिए उन्हें श्रुति नहीं कहा जाता क्योंकि ब्राह्मण ग्रन्थ ऋषियों की रचना है, इसलिए अपौरुषेय नहीं है।

बत्तीस विद्याएँ, दस महा विद्या नामक देवियाँ, षोडश कला और चौसठ कलाएँ ऐसे प्रयोग भाषा में पाये जाते हैं। इससे कुछ लोग भ्रमित होते हैं।
कुछ लोग अथर्ववेद को वेद नहीं मानते।
तो कुछ लोग ब्राह्मण ग्रन्थों को भी वेद कहते हैं। उनका तर्क रहता है कि, पूर्व मीमांसा दर्शन में महर्षि जैमिनी ने और उत्तर मीमांसा दर्शन में महर्षि बादरायण ने तथा भगवान आद्य श्री शंकराचार्य जी ने उपनिषद भाष्यों में उपनिषदों को श्रुति कहा है।
श्रीमद्भगवद्गीतासुपनिषद कहा जाता है, जिसे गलत भी नहीं कह सकते। लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत का अङ्ग है।

आदित्यहृदय स्तोत्र जैसे कुछ वाल्मीकि रामायण के भाग हैं।
कुछ उपनिषद अध्यात्म रामायण के भाग हैं।
कुछ उपनिषद योग वाशिष्ठ के भाग हैं।
कई उपनिषद तो पुराणों के भाग भी है।
स्मृति के भाग उक्त सभी उपनिषद 108 उपनिषदों या 209 उपनिषदों में परिगणित किये जाते हैं।
तो क्या पुराणों और रामायण, महाभारत को भी वेद कहोगे?
नही ना।; इसलिए ब्रह्मर्षियों द्वारा श्रुतियो पर किये भाष्य अर्थात व्याख्या ब्राह्मण ग्रन्थों को भी श्रुति नहीं होने के कारण वेद भी नहीं माना जाता हैं।

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