सोमवार, 29 सितंबर 2025

वैदिक सनातन धर्म और जैन मत।

परमात्मा के ॐ संकल्प से परब्रह्म (विष्णु-माया।)
परब्रह्म से ब्रह्म (प्रभविष्णु- श्री लक्ष्मी या सवितृ - सावित्री)
ब्रह्म से अपर ब्रह्म (नारायण- नारायणी या श्रीहरि- कमलासना गज लक्ष्मी)
अपर ब्रह्म से हिरण्यगर्भ -वाणी (त्वष्टा-रचना)
हिरण्यगर्भ से अर्धनारीश्वर एकरुद्र, सनक, सनन्दन, सनत् कुमार, सनातन और प्रजापति-सरस्वति हुए।
(प्रजापति को दक्ष-प्रसुति, रुचि-आकुति, कर्दम- देवहुति, स्वायम्भुव मनु- शतरुपा के रूप में जानते हैं।)
 स्वायम्भुव मनु -शतरुपा स्वायम्भुव मनु के पुत्र - प्रियव्रत 
प्रियव्रत के पुत्र - आग्नीध्र
आग्नीध्र - के पुत्र अजनाभ या नाभि
अजनाभ के पुत्र ऋषभदेव 
(जैन लोग ऋषभदेव को अपना प्रथम तीर्थंकर मानते हैं।)
ऋषभदेव के पुत्र बाहुबली और भरत चक्रवर्ती 
(जैन बाहुबली को भी मानते हैं क्योंकि बाहुबली ने संन्यास ले लिया था।)
लेकिन कहते हैं कि, हमारा मत-पन्थ सनातन है।
वेद और वैदिक बादमें हुए।

जैन मत वेद विरोधी नास्तिक और अनीश्वरवादी तान्त्रिक मत है, जिसमें यक्ष-यक्षिणी साधना की जाती है।
लेकिन 
विष्णु, प्रभविष्णु, नारायण श्रीहरि, हिरण्यगर्भ, प्रजापति, वाचस्पति-इन्द्र ब्रह्मणस्पति- आदित्य, ब्रहस्पति- वसु को ये इनके तीर्थंकरों के सेवक बतलाते हैं, लेकिन रुद्र, वीरभद्र-भद्रकाली (काली-चामुण्डा), भैरव, विनायक, शीतला, मोतीझरा (टाइफाइड) के मोती बापूजी के उपासक हैं।

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