भारतियों को अपने देश,धर्म,संस्कृति,भाषा और भूषा पर गर्व नहीं अपितु शर्म आती है।इसी कारण लगभग ढाई हजार वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में दासता भोगी। फिर भी नहीं सुधरे।सिंगापुर के लोग इसीलिए भारतियों से घृणा करते हैं क्योंकि, भारतियों ने ही आक्रान्ताओ की सेना में सम्मिलित होकर अपने देशवासियों पर अत्याचार करने, उन्हें दास बनाने में सहयोग दिया।आज भी गर्व से स्वयम् को दास (हिन्दू) कहते हैं।
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