मंगलवार, 30 सितंबर 2025

नाम जप

नाम जप की वैदिक परम्परा - प्राणायाम पूर्वक जप है।
प्रत्येक नाम जप की वैदिक परम्परा - प्राणायाम पूर्वक जप है।
प्रत्येक श्वासोच्छवास के साथ परमात्म भाव के साथ ॐ का स्मरण। या अर्थ और भाव सहित सावित्री मन्त्र जप करना है। के साथ परमात्म भाव के साथ ॐ का स्मरण करते रहना कर्तव्य है। या अर्थ और भाव सहित सावित्री मन्त्र जप करना है।
प्रारम्भ में यह बहुत कठिन लगता है। लेकिन निरन्तर अभ्यास से अवधि बढ़ती जाती है और एक समय ऐसा आता है कि, निद्रा में यहाँ तक कि, अचेतावस्था में भी श्वासोच्छवास के साथ ॐ का जप और परमात्मा का स्मरण बना रहता है। लेकिन यह परम सिद्धि की अवस्था है। इसके लिए सदाचारी जीवन, अष्टाङ्ग योग अभ्यास के साथ पञ्च महायज्ञ करते हुए जीवनशैली आवश्यक है।
जो लोग यह नहीं कर पाते हैं उनके लिए स्मृतियों में निरन्तर नाम जप विधान किया गया है।

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