शनिवार, 18 मई 2024

मण्डन मिश्र की माहिष्मती कहाँ थी?

पहले गणराज्यों की सीमा नदियों या पर्वत से ही बनती थी।
काशी और अयोध्या की सीमा निर्धारण सरयू नदी करती थी।
मिथिला की सीमाओं पर गण्डक, गङ्गा और कोशी नदियाँ थी। अध्यात्म रामायण के अनुसार महर्षि विश्वामित्र के साथ श्री राम के जनकपुरी में शिव धनुष देखने जाते समय गोतम आश्रम में तपस्यारत गोतम पत्नी अहिल्या का उद्धार इसी जगह किया था। इसके पश्चात अहिल्या गङ्गा के उत्तर तट पर गई।

 काशी की सीमा रोकने हेतु राजा उदापि ने अपने राज्यारोहण के चौथे वर्ष में गङ्गा और शोन के सङ्गम स्थल पर पटना दुर्ग बनाया था। तब शोण पटना से सटकर बहती थी।लेकिन आजकल गङ्गा पटना से ५० कि.मी. पश्चिम में हो गई है।

इन कारणों से उन क्षेत्रों में जन्में व्यक्तियों, या जिनका कार्यक्षेत्र ये स्थान रहे, या कोई पुस्तक इस क्षेत्र में रची गई, या किसी पुस्तक में इन क्षेत्रों का उल्लेख हुआ वे विवादित हो गये।
उदाहरणार्थ मण्डन मिश्र के निवास और आद्य शंकराचार्य जी से शास्त्रार्थ के स्थान के विषय पर मगध, मिथिला, मण्डला और मण्डलेश्वर जैसे कई स्थानों का दावा किया जाता है।
जबकि शास्त्रीय प्रमाण है कि,
मण्डन मिश्र का जन्म स्थान या निवास स्थान शोण तट, मगध सीमा और शालवन में था।

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