बुधवार, 15 मई 2024

वेदों का अर्थ और भाव कैसे जानें/ समझेंगे?

वेदों को समझने के लिए ब्राह्मण ग्रन्थों का अध्ययन आवश्यक है। जिसमें आरण्यक और उपनिषद सम्मिलित ही है।
वेद और ब्राह्मण ग्रन्थों की भाषा, अर्थ और भाव समझने के लिए षड वेदाङ्गों का अभ्यास चाहिए।
उच्चारण हेतु शिक्षा, शब्दार्थ ज्ञान हेतु निरुक्त और निघण्टु (शब्दकोश), वाक्य विन्यास और काक्य का अर्थ समझने के लिए व्याकरण, पेरोग्राफ, पद का भाव समझने के लिए छन्दशास्त्र और पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा दर्शन, तर्क समझने हेतु न्याय दर्शन, एकाग्रता के लिए पञ्चमहायज्ञ और अष्टाङ्ग योग, योग दर्शन अत्यावश्यक है। तथा विधि निषेध और व्यवस्था समझने के लिए धर्म सूत्र, यज्ञ वेदी, मण्डप और वास्तु तथा गणित ज्ञान हेतु शुल्बसूत्र, और सिद्धान्त ज्योतिष, बड़े यज्ञों की आवश्यकता, महत्व, उपयोगिता और विधि निषेध समझने के लिए श्रोत सूत्र, संस्कार, व्रत, पर्व, उत्सव और त्योहारों को मनाने के विधि- निषेध, आवश्यकता, उपयोगिता और महत्व जानने के लिए ग्रह्यसूत्र समझना आवश्यक है।
वैज्ञानिक तथ्य समझने के लिए आयुर्वेद, धनुर्वेद, शिल्पवेद/ स्थापत्य वेद और सामगान हेतु गन्धर्व वेद (उप वेदों) और समाज शास्त्र-राजनीति का ज्ञान अर्थशास्त्र का ज्ञान आवश्यक है।

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