शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

क्या जनन अशोच, मरण अशोच में एकादशी व्रत का पारण हो सकता है?

व्रत पालन मतलब नियम पालन।
जब जिसके माता-पिता का देहान्त होता है वह पुत्र तेरह दिनों तक विष्णु पूजा करता है जिसे घर के बाहर रखे पापा विष्णु की पूजा दस दिन करना कहते हैं, उसे जल चढ़ाना मतलब स्नान करवाना, स्वयम् के द्वारा पकाये भोजन का नैवेद्य अर्पित करना, धूप देना मतलब अग्निहोत्र करना, गरुड़ पुराण सुनना मतलब शास्त्र श्रवण करना आदि सभी कर्म करना होता है तो, नित्य कर्म (वैदिक धर्म-कर्म मतलब पञ्च महायज्ञ) का निषेध कैसे हो सकता है? 
हाँ, अवैदिक कर्म - तन्त्रोक्त कर्म, यथा - मूर्ति पूजन अवश्य निषेध है।

मृतक के निमित्त एकादशी व्रत का संकल्प लिया जाता है अन्य किसी व्रत का संकल्प नहीं दिलाया जाता, वही एकादशी व्रत कैसे छोड़ा जा सकता है?

एकादशी व्रत का सामान्य नियम यह है कि, एकादशी के पूर्व दिन सूर्यास्त पश्चात भोजन त्याग कर पारण समय में पारण करने पर ही एकादशी व्रत पूर्ण होता है। अन्यथा व्रत भङ्ग माना जाता है। यह नियम सभी व्रतों में सामान्य (कामन) है।
तो, 
सूतक में भी निष्काम व्रत पालन अवश्य ही करना चाहिए यह तो समझ आता है लेकिन सूतक में पारण नहीं होता यह उल्टा ज्ञान है।

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