शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

वेद ज्ञान परमात्मा में ही स्थित है, यह जानकर ही वेदपाठ करना सार्थक है।

ऋग्वेद १.१६४.३९

ऋचो अक्षरे परमे व्योमन् यस्मिन्देवा अधि विश्वे निषेदुः।
यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति य इत्तद्विदुस्त इमे समासते।।

अर्थ ---

वैदिक ज्ञान ऋचा अविनाशी अक्षर, सर्वव्यापी परम व्योम में, जिस में विश्व के समस्त देवता स्थित हैं या रहते हैं या हैं।
जो यह नहीं जानता, वह ऋग्वेद का क्या करेगा? अर्थात उसके द्वारा केवल वेद पाठ केवल दोहराना मात्र है। जो यह जानते हैं, वे ही परम अभेद (एकत्व) जानने वाले ज्ञानी हैं।

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