शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

कभी-कभी एकादशी व्रत का पारण हरिवासर समाप्त होने के बाद भी सीधे अपराह्न काल में ही क्यों बतलाया जाता है?

एक सामान्य जिज्ञासा होती है कि,
*कभी-कभी द्वादशी तिथि का एक चौथाई भाग अर्थात हरिवासर समाप्त होने के भी बाद भी पारण क्यों नहीं कर सकते?
उसका कारण यह है कि,

 *पारण (ब्रेक फास्ट) या तो प्रातः काल में (नाश्ते के समय) होता है या फिर भोजन के समय अपराह्न काल में होता है।* 
क्योंकि भोजन का समय अपराह्न काल को ही माना गया है। 
*क्योंकि वैदिक काल में लोग पूरे अहोरात्र में प्रायः अपराह्न काल में एक बार ही भोजन करते थे।*
मतलब 
*आज की भाषा में समझें तो प्रात काल में ब्रेक फास्ट (नाश्ता) और अपराह्न काल में लञ्च (भोजन) करते थे। डीनर (रात्रि भोज) निषिद्ध है। इसलिए सूर्यास्त के बाद खाने का प्रश्न ही नहीं।* 

सूर्योदय के पहले ब्रह्म मुहूर्त में सन्ध्या होती है, सावित्री (गायत्री) मन्त्र जप पूर्ण कर उदयिमान सूर्य को अर्घ्य देकर अतिथि यज्ञ और दान करके व्रत का पारण होता है।

मध्याह्न पूर्व भी सन्ध्या करके गायत्री मन्त्र जप करके ठीक मध्याह्न में सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
सायाह्न में भी सन्ध्या करके, गायत्री मन्त्र जप पूर्ण कर के सूर्यास्त समय अस्त हो रहे सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद वैदिक कर्म नहीं किए जाते हैं।
इस कारण गोधुलि लग्न में पाणी ग्रहण संस्कार भी उचित नहीं है। क्योंकि इस समय यदि पाणी ग्रहण संस्कार किया जाएगा तो सायाह्न सन्ध्या छूट जाएगी।

वास्तव में महाभारत युद्ध के बाद पौराणिक काल में सभी विद्वानों और धर्मी राजाओं की मृत्यु हो जाने के कारण गुरुकुल समाप्त होने लगे थे। इसलिए ज्योतिष में वेध लेना बन्द हो गया। सिद्धान्त ज्योतिष गणिताध्याय और गोलाध्याय (खगोल) के जानकार समाप्त होने लगे। इसलिए तिथियों और करण तथा असमान विस्तार वाले सत्ताइस नक्षत्रों का ठीक-ठीक प्रारम्भ और समाप्ति समय ज्ञात नहीं हो पाता था। इसलिए लगभग एक चौथाई द्वादशी तिथि (लगभग 06 घण्टे) की त्रुटि सम्भावित मान कर इसे हरिवासर मान कर इस अवधि में व्रत का पारण निषेध किया गया था। लेकिन अब पुनः एस्ट्रोनॉमी का अच्छा विकास हो गया है। ग्रह गणित और तिथि, करण और नक्षत्रों के प्रारम्भ और समाप्ति का समय ठीक-ठीक गणना होने लगी है इसलिए दशमी भेद और हरिवासर में पारण नहीं करना के नियम पालन अनावश्यक हो गया है।

उदाहरण देखिए ---

दिनांक 16 नवम्बर 2025 रविवार को इन्दौर में 

*प्रातः काल सूर्योदय 06:41 से 08:53 बजे तक।* फिर 

सङ्गव काल 08:53 से 11:05 तक । फिर 

मध्याह्न काल 11:05 से दोपहर 01: 17 बजे तक । जिसमें मध्याह्न सन्ध्या होती है। और इसके बाद भोजन का समय

*अपराह्न काल दोपहर 01:17 बजे से दोपहर 03:29 बजे तक रहेगा।*

तदुपरान्त  
सायाह्न काल दोपहर 03:29 से 05:41 सूर्यास्त तक। रहेगा। जिसमें पुनः सन्ध्या होती है।

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