गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

सनातन स्वाभिमान और महर्षि दयानन्द सरस्वती का योगदान

जबतक प्रत्येक सनातनी को सैन्य प्रशिक्षण नहीं दिया जाएगा, जब तक सनातनी पराङ्ग्मुखापेक्षी रहेगा तब तक हमारी दब्बू प्रवृत्ति बनी रहेगी।
पहले भी यही हुआ। क्षत्रिय आपस में लड़ते रहे, जन साधारण जमींदारों , ठाकुरों की लठेत सेना के भरोसे छोड़ दी गई।
हम न ईरानी आक्रमण सह पाते, न तजाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान के शक- कुषाण, हूण आक्रमण रोक पाया,न युनानी आक्रमण रोक पाये, तो इराक, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान के मुस्लिम आक्रांताओं को रोक पाये और न पूर्तगाल, नीदरलैंड्स के डच, फ्रांस और ब्रिटिश आक्रमण रोक पाये।
हमेशा लुटते-पिटते मन्दिरों में घण्टी बजाते पुजारी- पुरोहित, खेतों में हल जोतते किसान, व्यापारी, कारीगर सब देखते रहे या आक्रमणकारियों की सेना में भर्ती हो गए लेकिन अपने घर- परिवार, कुटुम्ब, ग्राम, राज्य, देश और धर्म की रक्षा की चिन्ता नहीं की। उसका उत्तरदायित्व क्षत्रियों पर छोड़ दिया।
सारे क्षत्रिय मर खप गये या युद्ध करना छोड़ खेती-बाड़ी करने लग गए तो कुषाण, शक, हूण, खस, ठस, बर्रबरों की शुद्धि कर उन्हें अग्नि वंशीय राजपूत बना दिया। और बाद में शकों को सूर्यवंशी, हूण- गुर्जरों को चन्द्र वंशीय घोषित कर दिया। और देश- धर्म की रक्षा का भार उनको सोप कर फिर से निश्चिन्त हो गये। 
पुराने अनुभव से सीखें बिना लूटते-पिटते रहे, इस्लाम स्वीकार करते रहे। ईसाई बनते रहे। देशद्रोह करते रहे। और अपने घर परिवार में खुश रहे। मन्दिरों में नाच- गान करते रहे।
महर्षि दयानन्द सरस्वती ने ललकारा, बाइबल, इसाई मजहब , कुरान, इस्लाम मज़हब और सनातध धर्म के मत पन्थ सम्प्रदाय का खणृडध कर इधर मत, पनृथ सम्प्रदायों को भूलकर भूलकर वेदों की ओर लौटने का कहा, जाति व्यवस्था छोड़कर गुण-कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था की ओर लौटने का आह्वान किया तथा मूर्ति पूजा छोड़ वैदिक पञ्च महायज्ञ की ओर लौटने का कहा, मुस्लिम और ईसाई बने सनातनियों की शुद्धि कर वापस सनातनी बनाने लगे तो उन्हें नास्तिक, अंग्रैजों और ईसाइयों का एजेंट कहने लगे।

शनिवार, 29 मार्च 2025

शालिवाहन शक एवम विक्रम संवत।

वास्तव में सनातन धर्म के ग्रन्थों के अनुसार विक्रम संवत निरयन मेष संक्रमण से प्रारम्भ होता है। अतः 14 अपल 2025 सोमवार को वैशाखी से प्रारम्भ होगा। 
पञ्जाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में वैशाखी और विक्रम संवत, बङ्गाल, उड़ीसा,असम में बिहु, वैशाख बिहु नाम से तमिलनाडु में मेषादि और मेष संक्रमण के नाम से केरल में विशु के नाम से मनाया जाएगा।

विक्रमादित्य के दादा जी ने स्वयम् हरियाणा के कुरुक्षेत्र के निकट मालवा क्षेत्र से सोनकच्छ में आकर राज्य किया था। इसलिए पञ्जाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में विक्रम संवत का महत्व अधिक है। वे आज भी प्राचीन परम्परा अनुसार विक्रम संवत प्रारम्भ करते हैं।
लेकिन विक्रमादित्य के केवल 135 वर्ष बाद ही सातवाहन साम्राज्य और कुषाण साम्राज्य स्थापित हो गए और उन्होंने तिब्बती परम्परागत सायन सौर-चान्द्र तिथि पत्रक लागू कर दिया। लेकिन ज्योतिष के जानकार धर्माचार्यों ने इसे विक्रम संवत से जोड़ने हेतु निरयन सौर संक्रमण आधारित चान्द्र वर्ष में बदल दिया।

सन्त श्री रामचन्द्र केशव डोंगरे महाराज भागवत कथा वाचक।

हम स्व श्री सन्त रामचंद्र केशव जी डोंगरे महाराज की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भागवत पुराण की कथा को बड़े पैमाने पर प्रसिद्ध किया था।

उन्होंने दिन के समय में बड़े पाण्डालों में भागवत कथा सुनाना शुरू किया था, जो एक नए युग की शुरुआत थी। जब उनकी कथा का आयोजन इन्दौर में दशहरा मैदान में हुआ था, जिसमें धार, देवास, उज्जैन और निमाड़ तक से लोग कथा सुनने आये थे।

यह एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसने भागवत पुराण कथा को एक नए स्तर पर पहुंचाया था। स्व श्री सन्त रामचंद्र केशव जी डोंगरे महाराज की कथा का प्रभाव आज भी लोगों के जीवन में देखा जा सकता है।

सोमवार, 24 मार्च 2025

सनातन धर्म शब्द मनुस्मृति में है।

*मनु स्मृति में स्नातक धर्म* शब्द है।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् । प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् , *एष धर्मः सनातन:* ॥ —मनुस्मृति 4.138

अर्थं च धर्मं च परमं च कामं

यं प्राहुश्चतुर्वर्ण्यविधानकर्तारम्।

*स एष सनातनधर्म गोप्ता*

व्यक्तो ह्यजः शाश्वतो लोके॥

—मनुस्मृति १-२३

रोगी प्रशन लग्न

*रोगी प्रश्न लग्न से* 

लग्न से वैद्य (डॉक्टर)
चतुर्थ भाव से औषधी
पञ्चम भाव से रोग
दशम भाव से रोगी 

लग्न एवम् दशम में सुसम्बन्ध हो, मैत्री हो तो वैद्य (डॉक्टर ) से लाभ होगा।
सप्तम और चतुर्थ भाव बलवान एवम् परस्पर मित्र हो तो औषधी से लाभ होगा।
विपरित स्थिति में हानी होगी। रोग बढ़ेगा।

सोमवार, 17 मार्च 2025

स्त्री - पुरुषों के कार्य विभाग प्राकृतिक हैं।

नृत्याङ्गनाएँ कितना ही कलात्मक नाट्य (नृत्य) प्रस्तुत करें लेकिन अधिकांश नृत्य गुरु पुरुष होते हैं।
महिलाएँ एक से एक स्वादिष्ट भोजन रोज बनातीं है।
लेकिन रसोइयों की बात ही कुछ और है।
फिर भी 
नृत्य गुरु द्वारा प्रस्तुत नृत्य में वह रस वह आनन्द नहीं आयेगा जो उनकी शिष्य नृत्यांगना के नृत्य में आयेगा।
ऐसे ही 
रसोइये कितना ही स्वादिष्ट भोजन, कितने ही स्वादिष्ट व्यञ्जन बनाए, लेकिन दो-तीन दिन से अधिक नहीं खा सकते। जबकि, महिलाओं द्वारा तैयार की गई दाल, भात, सब्जी, रोटी जीवन भर खा कर भी उकताहट नहीं होती।
राज्य / शासन जब महिला करतीं हैं तो कठोरता पूर्वक शासन करतीं हैं और सफल होती हैं। लेकिन शासनकाल दीर्घ नहीं रहता।
पुरुषों का शासनकाल दीर्घ होता है लेकिन उतने कठोर निर्णय नहीं लेते, इसलिए लोगों को हमेशा कुछ कमी लगती है।

यही प्रकृति है।

शनिवार, 8 मार्च 2025

भगवान, महात्मा, सन्त, महापुरुष, श्रीमन्त, श्रेष्ठि या बड़े लोग में अन्तर

समग्र ऐश्वर्य, बल, यश, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य, इन छः को “भग” कहते हैं। ये जिसमें एकत्रित हैं, वह भगवान् है।

धर्मनिष्ठ, सदाचारी, अध्यात्मिक अनासक्त, वितरागी ब्रह्मवादियों को महात्मा कहते हैं। 

चमत्कारी सन्तों को गुजराती में बापू कहते हैं, तो मालवी में बापजी कहते हैं।
अंग्रेजी में सेंट कहते हैं। उर्दू में बाबा कहते हैं।

पराक्रमी, वीर, विजेताओं को महापुरुष कहते हैं। अंग्रेजी में इन्हें ग्रेट कहते हैं।

सत्ताधारी, प्रभावशाली को श्रीमन्त कहते हैं ।

धनवान को श्रेष्ठि या बड़े लोग कहां जाता है।