राशि और नक्षत्र के योग से 36 योग बनते हैं।
पूरी कुण्डली में
1 किस ग्रह, भाव (खाने) का बल और शुभाशुभत्व कैसा है?
2कौन-सा ग्रह किस भाव (खाने) का स्वामी होकर किस भाव (खाने) में बैठा है?
3 किस-किस भाव (खाने) को देख रहा है?
4 किस भाव (खाने) के स्वामी को देख रहा है?
5 किस भाव (खाने) के स्वामी द्वारा देखा जा रहा है?
इन सब का कोई महत्व नहीं है।
ऐसे ही पूरी कुण्डली के 12 भाव (खानों) में से पाँच भाव(खाने) 1,4,7,8 और 12 वें भाव (खाने) में मङ्गल हो तो कुण्डली माङ्गलिक कहलाती है।
इसका फल माना जाता है कि, लाइफ पार्टनर (पति या पत्नी) की आयु क्षय करता है।
इस दोष का हरण करने के लिए सामने वाले (वर या वधू) की कुण्डली में इन्हीं 1,4,7,8 और 12 वें भाव (खाने) में से किसी भी भाव (खाने) में, मङ्गल > शनि > सूर्य > राहु > केतु में से कोई एक भी ग्रह हो तो माङ्गलिक मिलान ठीक हो जाता है।
शास्त्रों में तो और भी बहुत से परिहार भी बतलाये हैं, जिनका ज्ञान नगण्य ज्योतिषियों को है।
जैसे 3,6, या 11 वें भाव में भी यदि मङ्गल > शनि > सूर्य > राहु > केतु में से कोई एक भी ग्रह हो तो माङ्गलिक दोष का परिहार हो जाता है।
जिसकी कुण्डली में माङ्गलिक दोष है उसकी कुण्डली में मङ्गल उच्च का हो या नीच का हो या वक्री या अस्त हो तो भी माङ्गलिक दोष का परिहार हो जाता है।
और भी आयु अधिक होना (मतलब केवल बाल विवाह में ही निषेध था।) और 25 से अधिक या 27 से अधिक गुण मिलने पर भी माङ्गलिक दोष का परिहार हो जाता है।
लेकिन यह जानकारी नगण्य पारम्परिक ज्योतिषियों को है।
मतलब उनके मतानुसार तो दोनों एक दूसरे की आयु क्षीण करके मर जाएंगे और बच्चे अनाथ हो जाएंगे उसे अच्छा मानते हैं।🤔
ऐसे मुर्खतापूर्ण सिद्धान्तों में मेरी रत्ती मात्र भी श्रद्धा नहीं है।
लेकिन जब कोई ज्योतिषी से पूछता है तो, ज्योतिषी का कर्तव्य है कि, प्रचलित परम्परा अनुसार उत्तर दे। इसलिए वह भी बतलाता हूँ।