शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

रोहिङ्ग्या समस्या पर भारत का विचित्र रुख।

आश्चर्य है कि, बर्मा के रोहिंग्या मुसलमानों को तीसरे देश में भेजने की राष्ट्रपति थीन सीन की योजना को बढ़ावा देने के लिए असीन वीरसू या वीरथु और विराधु नाम से प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु विन खिंग ऊ (Win Khin Oo)  ने सितंबर 2012 में मांडले में भिक्षुओं की एक रैली का नेतृत्व किया। और 2017 में रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रान्त से  असीन वीरसू या वीरथु और विराधु द्वारा  भगाये गये रोहिंग्याओं को अन्य देशों के समान  घुसने से रोकने का कोई कड़ा प्रबन्ध नहीं किया। केवल विरोध प्रदर्शन किया।
और उन्हें वापस रखाइन प्रांत में बसाने के लिए भूकम्परोधी मकान बना कर दिये। रखाइन विकास बोर्ड की स्थापना की।

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