आस्था चेनल
स्वामी शंकरदेव जी महाराज।
स्वामी शंकरदेव जी महाराज पतंजलि वाले बाबा रामदेव जी के संन्यास दीक्षा गुरु हुए थे।
स्वामी शंकरदेव जी महाराज ने कनखल में दिव्य फार्मेसी शुरू की थी, जो बाद में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट बनी। वहीं से आयुर्वेदिक दवाइयाँ और योग का प्रचार शुरू हुआ। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण शुरुआती दिनों में इसी आश्रम के दो कमरों में रहते थे और साइकिल से दवाइयाँ बेचते थे।
14 जुलाई 2007 को सुबह टहलने के लिए निकले और फिर लौटे नहीं। कृपालु बाग आश्रम से रहस्यमय हालात में लापता हो गए। काफी खोज के बाद आचार्य बालकृष्ण ने कनखल थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला तो मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
उनके शिष्य स्वामी कर्मवीर ने अपनी किताब 'प्राण साधना एवं योग रहस्य' में लिखा है कि लापता होने से 2 दिन पहले शंकरदेव जी ने उनसे फोन पर कहा था - *'मैं आश्रम की कुछ गतिविधियों से बहुत निराश हूँ, मेरे साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है, शायद मेरी आपसे अंतिम बात होगी'*।
स्वामी कर्मवीर के अनुसार उनका आज तक शव नहीं मिला और न ही मृत्यु का कारण पता चला। सीबीआई आज भी इस मामले की जांच में लगी हुई है।
अपने आखिरी दिनों में स्वामी शंकरदेव जी महाराज बहुत सादगी और तंगहाली में रहते थे। आश्रम के गत्ते-बोरे तक खुद कबाड़ी को बेचते थे।
श्री राजीव दीक्षित।
*2009 ईस्वी मे श्री राजीव दीक्षित बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया। आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव दीक्षित के इस निर्णय से सहमत नहीं थे। फिर भी राजीव दीक्षित ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी। जिसका मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना। योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन वापिस लाना, गौ हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए शुरू किया गया था ।*
*29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे । उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे । दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 01 बजे तक थी। राजीव दीक्षित ने विशाल जन सभा को आयोजित किया । इसके बाद का कार्यक्रम साय 04 बजे दुर्ग मे था। जिसके लिए वह दोपहर 02 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए ।*
*(इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है)*
*उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद श्री राजीव दीक्षित जी का शरीर पसीना पसीना हो गया । दयासागर ने राजीव दीक्षित जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचालय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा । फिर श्री दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव दीक्षित जी शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर जी ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ । जब काफी देर बाद राजीव दीक्षित जी बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव दीक्षित जी पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे । उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर जी ने उनको अस्पताल चलने को कहा । राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे ।*
*थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी । फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई के सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया । इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको अपोलो बी. एस. आर. मे भर्ती करवाया गया । राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे । उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे। उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा।*
*फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे । उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया ।*
*30 नवम्बर 2010 को दीक्षित को अचानक दिल का दौरा पड़ने के बाद पहले भिलाई के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। उसके बाद अपोलो बी. एस. आर. अस्पताल में दाखिल कराया गया। उन्हें दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन इसी दौरान स्थानीय डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों का कहना था कि उन्होंने ऍलोपैथिक इलाज से लगातार परहेज किया। चिकित्सकों का यह भी कहना था कि राजीव दीक्षित जी आयुर्वेदिक दवाओं के लिये अड़े हुए थे। अस्पताल में कुछ दवाएँ और इलाज से वे कुछ समय के लिये बेहतर भी हो गये थे मगर रात में एक बार फिर उनको गम्भीर दौरा पड़ा जो उनके लिये घातक सिद्ध हुआ।*
*राजीव दीक्षित जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया । 30 नवंबर 2010 को उनके मृत शरीर को पतंजलि, हरिद्वार लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे । और 01 दिसंबर 2010 को राजीव दीक्षित जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया ।*
*राजीव दीक्षित जी के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव दीक्षित जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था । उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया ।
*राजीव दीक्षित जी की मृत्यु से जुडे कुछ सवाल।*
*किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया ? कि राजीव दीक्षित की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ?*
*29 नवंबर 2010 को दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था 12 घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान नहीं हो पाया ?*
*आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी ?*
*राजीव दीक्षित का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था ?*
*राजीव दीक्षित के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था ?*
*30 नवंबर 2010 को जब उनको पतञ्जलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?*
*राजीव दीक्षित की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया ?? अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ?*
*अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई ।*
*राजीव दीक्षित के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव दीक्षित को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव दीक्षित पतञ्जलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे । जबकि राजीव भाई खुद अपने एक व्याख्यान मे बता रहे हैं कि उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है । वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए ! और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं ।*
और
*राजीव दीक्षित के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव दीक्षित जी की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतञ्जलि योगपीठ वालों ने राजीव दीक्षित जी की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया ?*
*मञ्चो के पीछे उनकी फोटो क्यों नहीं लगाई जाती ?*
*आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान दिखाने क्यों बन्द कर दिये गए ?*
*कभी साल अगर उनकी पुण्यतिथि पर व्याख्यान दिखाये भी जाते है तो वो भी 2-3 घण्टे के व्याख्यान को काट काट कर एक घण्टे का बनाकर दिखा दिया जाता है ।*
इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि ;
*भारत स्वाभिमान आन्दोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव दीक्षित जी की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ।*
*राजीव दीक्षित जी और बाबा रामदेव खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे । लेकिन राजीव दीक्षित जी की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव दीक्षित जी की सोच के विरुद्ध आज वो भाजपा सरकार का समर्थन कर रहें । इसलिए बहुत से राजीव दीक्षित जी के चाहने वाले भारत स्वाभिमान से हट कर अपने अपने स्तर पर राजीव दीक्षित जी का प्रचार करने मे लगे हैं ।*
राजीव दीक्षित जी ने अपने पूरे जीवन मे देश भर मे घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये। सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे । उन्होने विदेशी कम्पनियो की नाक मे दम कर रखा था ।
*भारत के किसी भी मीडिया चैनल ने उनको दिखाने का साहस नहीं किया । क्योकि वह देश से जुडे ऐसे मुद्दो पर बात करते थे की एक बार लोग सुन ले तो देश मे 1857 से बडी क्रांति हो जाती।*