जिस दिन उक्त योग बना उस दिन वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि थी।
इसलिए वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा गया।
तभी से अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है।
गणना अनुसार त्रेतायुग का प्रारम्भ भी अक्षय तृतीया को हुआ था।
युगादि भी होने के कारण इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया।
युगादि तिथियों में स्नान श्राद्ध - तर्पणादि और दान किया जाता है।
वसन्त विषुव अर्थात वैदिक नव संवत्सर प्रारम्भ दिवस होने से कृषक लोग भूमि का बंटवारा अक्षय तृतीया को ही करते हैं।
इस दिन पूरे दिन मुहुर्त शुभ माना जाता है।
*अक्षय तृतीया और परशुराम जयन्ती 19 अप्रैल 2026 रविवार को है।*
इन्दौर में
सूर्योदय 06:04 बजे होगा।
मध्यान्ह 12:26 बजे होगा।
मध्याह्न काल 11:10 बजे से 01:42 बजे तक रहेगा।
सूर्यास्त 06:47 बजे होगा।
गोधुलि वेला 06:47 से 07:10 बजे तक रहेगी।
सायं सन्ध्या 06:47 से 07:55 बजे तक रहेगी।
प्रदोषकाल 06:47 हे रात 09:03 बजे तक रहेगा।
तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 रविवार को दिन में 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026 सोमवार को प्रातः 07:27 बजे तक रहेगी।
*अक्षय तृतीया 20 अप्रैल 2026 सोमवार को क्यों नहीं।*
*स्पष्टीकरण*
*20 अप्रैल 2026 सोमवार को तृतीया तिथि 7:27 बजे तक रहेगी।*
20 अप्रैल 2026 सोमवार को इन्दौर में उपरी कोर दृष्य
सूर्योदय 06:02:27
सूर्यास्त 18:49:38
दिनमान 12:46:10
प्रातः काल 12:46:10÷5= 02:33:14
*प्रातः काल सूर्योदय 06:02:27 बजे से 08:35:41 बजे तक रहेगा।*
जबकि शास्त्रीय *नियमानुसार तो उदिया तृतीया यदि तीन मुहूर्त अर्थात 06 घटि अर्थात प्रातः काल के बाद तक हो तभी अक्षय तृतीया के रूप में मान्य है।*
*इसलिए प्रातः काल समाप्ति 08:36 बजे के भी 01 घण्टा 09 मिनट पहले (02 घटि 52 पल 30 विपल) पहले ही 07:27 बजे समाप्त हो जाने वाली तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कैसे माना जा सकता है?*
दुसरा
*युगादि पर किया जाने वाला श्राद्ध तर्पण अपराह्न व्यापी तृतीया में ही हो सकता है। जबकि तृतीया तिथि प्रातः काल में ही समाप्त हो चुकी होगी।*
श्राद्ध में उदिया तिथि का कोई महत्व नहीं होता है। अपराह्न काल वाली तिथि ही मान्य होती है।
वैदिक काल में असमान क्षेत्र वाले नक्षत्र और मधु, माधव आदि महिनों के नाम से ही जानी जाने वाली तीस-तीस अंशो वाली सायन प्रधि (प्रधियाँ) ही प्रचलित थी (जिसे आजकल सायन राशियाँ कहा जाता है।)
*भारत में विक्रमादित्य के समय आचार्य वराहमिहिर ने 13°20' के समान क्षेत्र वाले नक्षत्र, और पश्चिम टर्की, इराक के बेबीलोन और मिश्र में प्रचलित पशुओं की आकृति वाली समान तीस-तीस अंशो वाली निरयन मेषादि राशियों तथा रविवार आदि वारों का प्रचलन प्रारम्भ किया। इसके पहले मेष वृषभादि निरयन राशियाँ, 13°20' के समान भोग वाले नक्षत्र और सोमवार/ बुधवार भारत में कोई नहीं जानता था।*
*अतः सोमवार बुधवार को पढ़ने वाली तृतीया विशेष पुण्यदाई मानना केवल पौराणिक परम्परा है। श्रोत/ स्मार्त मत नहीं है।*
*अक्षय तृतीया पर विवाह करने वालों को रिक्ता तिथि चतुर्थी में विवाह करना पड़ेगा यह भी एक मुद्दा है, लेकिन अक्षय तृतीया पर विवाह शास्त्रीय मत न होकर केवल परम्परा मात्र है इसलिए विचारणीय नहीं है। फिर भी समस्या तो है ही।*
ध्यान रखें श्रोत - स्मार्त मतानुसार सर्वकालिक तिथि ही महत्व रखती है।
*जहाँ उदिया तिथि ग्राह्य होती है वहाँ भी शाकल्यपादिता तिथि अर्थात तीन मुहूर्त अर्थात छः घटि तक (सूर्योदय के बाद 02 घण्टे 24 मिनट तक) रहे तभी मान्य होती है।*
वास्तव में तो दिनमान को पाँच से भाग देकर (दिनमान÷5=) तीन मुहूर्त या छः घटि निकालते हैं।
*20 अप्रैल 2026 को तृतीया तिथि सूर्योदय के बाद केवल 03 घटि 32 पल तक ही रहेगी।* अर्थात दो मुहूर्त भी नहीं है।
*जबकि 19 अप्रैल 2026 रविवार को तृतीया तिथि दिन में 10:49 बजे लगेगी। अतः मध्याह्न व्यापी, अपराह्न व्यापी प्रदोषकाल व्यापी तथा पूर्ण रात्रि व्यापी तिथि है।*
*अतः अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 रविवार को ही है।*
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