सोमवार, 13 अप्रैल 2026

निरयन मेष संक्रमण से नक्षत्रीय नव संवत्सर युधिष्ठिर संवत और विक्रम संवत का प्रारम्भ।

*युधिष्ठिर संवत 5163 विक्रम संवत 2083 का प्रारम्भ, वैशाखी, निरयन मेष संक्रमण 14 अप्रैल 2026 मङ्गलवार को प्रातः 09:33 बजे होगा।*
*पुण्यकाल सूर्योदय समय (इन्दौर में 06:21 बजे से) दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा।* 
*धार्मिक प्रयोजन मे युधिष्ठिर संवत 5163 विक्रम संवत 2083 का प्रारम्भ निरयन मेष संक्रमण के समय दिन में 09:33 बजे से होगा।*
*लेकिन व्यवहार में सूर्योदय से ही लागू होगा। इन्दौर में सूर्योदय समय 06:21 बजे होगा ‌।*

वैशाखी पर्व भी 14 अप्रैल मङ्गलवार को है। यह खालसा पन्थ की बैसाखी से मिलता है, लेकिन खालसा पन्थ नानक पन्थी पञ्चाङ्ग के आधार पर अमृतसर के लिए बैसाखी निर्धारित करते हैं।

*ब्राह्मण ग्रंथों और श्रोत सूत्र -गृह्य सूत्र ग्रन्थों में क्रान्ति वृत के ठीक मध्य में चित्रा तारे को माना गया है। अर्थात चित्रा तारे को भूमि द्वारा सूर्य के परिभ्रमण पथ के ठीक मध्य में अर्थात 180° पर माना गया है। इसलिए क्रान्तिवृत और नक्षत्र पट्टी का प्रारम्भ बिन्दु चित्रा तारे से 180° पर माना गया है। यही अश्विनी नक्षत्र का प्रारम्भ बिन्दु होता है। इसे निरयन मेषादि बिन्दु पर भी कहते हैं।*

*आकाश का नित्य अवलोकन करने वाले किसान आदि और तारों (Star's) को पहचानने वाले खगोल शास्त्री आकाश में देख सकते हैं कि, निरयन मेष संक्रमण/ वैशाखी (14 अप्रैल) को सूर्योदय के ठीक पहले चित्रा तारा पश्चिम में अस्त हो रहा होगा। और सूर्यास्त के ठीक बाद में चित्रा तारा पूर्व में उदय हो रहा होगा। यह नक्षत्रीय नव संवत्सर प्रारम्भ होने की पहचान है।*

*पञ्जाब हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा और नेपाल में जिन दो सूर्योदय के बीच निरयन मेष संक्रमण होता है उसी दिन वैशाखी से नव वर्ष मनाते हैं। चूंकि मङ्गलवार और बुधवार के सूर्योदय के बीच निरयन मेष संक्रमण होगा इसलिए 14 अप्रैल 2026 मङ्गलवार को सूर्योदय के समय वैशाखी से नव वर्ष मनाते हैं। इसी दिन यहाँ विक्रम संवत 2083 का प्रारम्भ होगा।*
*उत्तर प्रदेश में सतुआ संक्रान्ति कहते हैं।*

*बङ्गाल और असम में में जिन दो मध्यरात्रियों के बीच में निरयन मेष संक्रमण होता है उसके आधार पर नववर्ष प्रारम्भ करते हैं। चुंकि,13 उपरान्त 14 अप्रैल 2026 सोमवार Tuesday को मध्यरात्रि के बाद मेष संक्रमण होगा इसलिए बङ्गाल में नबा वर्ष पाहेला बोईशाख 14 अप्रैल 2026 मङ्गलवार से प्रारम्भ होगा। बङ्गाल में लोग परस्पर सुभो नोबो बोरशो कह कर बधाई देते हैं।*

*उड़ीसा में 14 अप्रैल से पणा संक्रान्ति या महा बिशुबा के रूप में नव वर्ष मनाएंगे।*

*त्रिपुरा में भी 14 अप्रैल को निरयन मेष संक्रमण से ही नव वर्ष प्रारम्भ होता है।*

*असम में निरयन मेष संक्रमण 14 अप्रैल से ही बिहू या बोहाग बिहू और रोंगोली बिहू नाम से नव वर्ष मनाएंगे। बोहाग बिहु का प्रथम दिन गोरू बिहू कहलाता है।*

*तमिल नाडु में सोमवार को सूर्यास्त के बाद निरयन मेष संक्रमण होने के कारण तमिल नाडु में 14 अप्रैल 2025 से पथाण्डु के नाम से नव वर्ष मनाएंगे।*
पुडुचेरी में भी तमिलनाडु के समान ही निरयन मेष संक्रमण दिवस से ही नव वर्ष मनाते हैं।

*सोमवार को सूर्योदय पश्चात 18 घटि अर्थात 07 घणटे 12 मिनट के बाद निरयन मेष संक्रमण होने से केरलम में 14 अप्रैल को विषुकानी नाम से नववर्ष मनाएंगे।*

इसके अलावा श्रीलङ्का, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, थाईलैंड और सिङ्गापूर में बसे तमिल, मलयाली जन भी निरयन मेष संक्रमण के दिन से ही नववर्ष प्रारम्भ करते हैं।

अर्थात *सातवाहन वंश और शक और कुषाणों द्वारा शासित पश्चिम भारत और मध्य भारत के पौराणिक मतावलम्बियों को छोड़कर शेष उत्तर भारत, पूर्वी भारत, और दक्षिण भारत में तथा बाङ्ग्ला देश, श्रीलङ्का, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, थाईलैंड और सिङ्गापूर में बसे तमिल, मलयाली जन भी निरयन सौर संक्रमण से प्रारम्भ होने वाला नव संवत्सर और मेष-वृषभादि मास तथा वैशाखी, विषु, माघ बिहू आदि पर्व मनाते हैं।*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें