ऐसे ही अल्लाह से मिलने येरुशलम से बुर्राक नामक गधी पर बैठ कर मोह मद गया था।
चार फ़रिश्ते अल्लाह का सिंहासन उठाये रहते हैं।
फिर वह एकदेशीय जीव निराकार कैसे हो सकता है।
लेकिन अब्राहमिक मतावलम्बी उसे निराकार कहते हैं।
ऐसी ही बुद्धी हीनता पौराणिकों ने दर्शाई।
सर्वव्यापी विष्णु, नार (प्रकृति या जल) पर अयन करने वाले एक देशी नारायण को एक ही व्यक्ति बतला दिया।
वत्रासुर, शम्भर आदि अनेक असुरों, दैत्यों का वध करने वाले इन्द्र को सदा पराजित होने वाला बतला दिया। और परेशान देवताओं की सहायतार्थ श्री हरि को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है। वह भी एक छोटे से क्षेत्र लङ्का द्वीप/ लङ्का पुरी, मथुरा के राजाओं को मारने के लिए!
पञ्च मुखी (अण्डाकार) हिरण्यगर्भ ब्रह्मा और चतुर्मुख प्रजापति ब्रह्मा को एक बतलाने के लिए रुद्र के हाथों ब्रह्मा का सिर कटवा दिया।
उसके पीछे भी अनेक कारण जोड़ लिए।
1 वाणी-हिरण्यगर्भ ब्रह्मा की मानस सन्तान प्रजापति ब्रह्मा और सरस्वती। अर्थात प्रजापति की शक्ति सरस्वती।
सरस्वती को देख कर प्रजापति कामुक हो गये और (उषा के पीछे-पीछे सूर्य के रूपक से) सरस्वती के पीछे प्रजापति ब्रह्मा दौड़े। इस लिए रुद्र ने एक सिर काट डाला।
हिरण्यगर्भ ब्रह्मा का ऊपरी सिरा वेद विरुद्ध असुरों के हित में मन्त्रोच्चार कर रहा था इसलिए तन्त्र रचियता रुद्र ने तान्त्रिक क्रिया करने के आरोप में ब्रह्मा का ऊपरी सिर काट डाला।
ज्योतिर्लिङ्ग का सिरा नहीं खोज पाने के बाद भी खोज लिया कहकर झूठ बोलने वाला सिर काट डाला।
अपराधी को दण्ड देने से रुद्र को ब्रह्म हत्या का पाप के रूप में वह ब्रह्मशिर चिपक गया।
इतनी बे-सिर-पैर की कल्पना सनातन वैदिक धर्म में घुसा दी। इन पौराणिकों से बड़ा पापी और कौन हो सकता है।
जिन्होंने सती के आत्मदाह की झूठी कहानी गढ़ी। देवी देवता अमर होते हैं तो सती मर कैसे गई?
महा विशविज्ञानी भगवान शंकरजी सती की मृत्यु से विक्षिप्त कैसे हो सकते है?
शंकर जी ने सती की भस्मीभूत देह का शव कन्धे पर कैसे लटकाया?
शंकर जी के कन्धे पर टंगी सड़ी गली लाश के इक्कावन टूकड़े क्यों करना पड़े? वो भी भगवान विष्णु को!
शंकर जी को तब तक भी होंश नहीं आना भी आश्चर्य जनक है।
देवी सती का पुनर्जन्म भी हुआ!
हिरण्यगर्भ ब्रह्मा के मानस पुत्र कामदेव को भी भस्म कर दिया!
कामदेव का भी पुनर्जन्म हुआ।
पतिव्रता नारी रतिदेवी ने कामदेव के दुसरे जन्म वाले स्वरूप को भी अपना पति मान लिया!
शंकर भगवान को नशेड़ी बतला दिया।
वैरागी भगवान शंकरजी और योगेश्वर श्रीकृष्ण को कामुक बतला दिया। ब्रह्मचारी हनुमानजी का गुरु की पुत्री से विवाह करवा दिया और पसीने से मछली को गर्भवती होना भी बतला दिया। और मकर ध्वज को पुत्र बतला दिया।
इतने झूठ तो कोई बड़ा अपराधी भी नहीं बोलता होगा।
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