शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

मानव योनि श्रेष्ठतम है।

वाल्मीकि रामायण में बाली, सुग्रीव, हनुमान जी, अङ्गद आदि ने कई बार स्वयम् को मानवों से निम्नतर योनि कहा है।
मानवों से उच्चतर केवल देवताओं को ही माना गया है।
गन्धर्व भी मूलतः मानव जाति के ही थे। इनमेऔ कुछ देवताओं की सन्निधि पाकर देव गन्धर्व कहलाये। जैसे मानवों में भी कई ऋषि, राजन आदि देवताओं के निकटतम सम्पर्क में ही नहीं थे अपितु भ्रगु जैसे ऋषिगण तो देवताओं को छोड़ों देवों को भी दण्डित करते थे।
महाराजा रैवत तो पुत्री को भी ब्रह्मा जी के लोक में ले गए थे। मान्धाता, दीलिप, रघु, दशरथ, महाराज मुचुकुंद आदि देवासुर संग्राम में देवताओं के पक्ष में लड़ते थे।
यक्षों (मङ्गोल) और राक्षसों (निग्रो) को बन्धु (भाई) माना जाता है। लेकिन यक्षराज मणिभद्र और शंकरजी के मित्र कुबेर जैसे कुछ यक्ष देवयक्ष कहलाते हैं। लेकिन ये अपवाद ही होते हैं।
यों तो हम (नागपाल, नागरथ सरनेम वाले कालबेलिया) नागों की भी पूजा करते हैं। गो माता की भी पूजा करते हैं। पीपल आदि वृक्षों की भी पूजा करते हैं। लेकिन इन सब योनियों से मानव योनि श्रेष्ठतम है।

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