सोमवार, 6 अप्रैल 2026

महाभारत के अनुसार दक्ष द्वितीय के यज्ञ मे सती ने आत्मदाह नहीं किया। बल्कि शंकर-पार्वती दक्ष यज्ञ में साथ में गये थे और साथ में ही सहर्ष लौट आये।

*प्रचेताओं के पुत्र दक्ष द्वितीय की पुत्री सती पार्वती ने दक्ष यज्ञ में आत्मदाह नहीं किया। वे जीवित ही शंकर जी के साथ कैलाश लौटी थी।*
*यदि दक्ष यज्ञ में सती आत्मदाह करती, सती का पुनर्जन्म होता और पार्वती के रूप में शंकर जी से विवाह होता तो वाल्मीकि भी रामायण में कुछ तो उल्लेख करते ही।*
*कृपया गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित महाभारत पञ्चम खण्ड,शान्ति पर्व/ मौक्ष पर्व/ अध्याय २८४ पृष्ठ ५१६६ या संक्षिप्त महाभारत का पृष्ठ १२८१ देखें।*
*महाभारत में  उल्लेखित दक्षयज्ञ विध्वंस की कथा के अनुसार प्रचेताओं के पुत्र दक्ष द्वितीय  द्वारा किए गए यज्ञ में सभी देवताओं और ऋषियों को बुलाया लेकिन शंकर पार्वती को नहीं बुलाया।*
*देवताओं को समुह में जाते देख पार्वती ने शंकर जी से पुछा, तब शंकर जी ने पार्वती को बतलाया कि, दक्ष (द्वितीय) यज्ञ कर रहे हैं, उसमें उनके निमन्त्रण / आह्वान पर देवता यज्ञभाग लेने जा रहे हैं।*
*पार्वती द्वारा यह आपत्ति जताई कि, आप रुद्र को यज्ञभाग लेने हेतु क्यों आमन्त्रित नहीं किया गया।*
*तब शंकर जी बतलाते हैं कि, इसमें दक्ष का कोई दोष नहीं है। सृष्टि के आदि में प्रजापति ब्रह्मा ने रुद्र को यज्ञभाग न देने का विधान किया गया था। इसलिए मुझे नहीं बुलाया।*
*दक्ष द्वारा यज्ञ में न बुलाने और यज्ञभाग न देने की जानकारी से रुष्ट पार्वती (न कि, सती) को साथ लेकर स्वयम् शंकर जी दक्ष यज्ञ स्थल पर गये। वहाँ पार्वती अपनी नाराज़गी प्रकट करती है। केवल दधीचि पार्वती का समर्थन करते हैं। शेष सब मौन ही रहते हैं। दक्ष पर पार्वती के रोष का कोई प्रभाव न देखकर पार्वती जी और रुष्ट हो गई। इसे देखकर शंकरजी ने वीरभद्र और भद्रकाली का आह्वान किया। और वीरभद्र और भद्रकाली को दक्षयज्ञ विध्वंस का आदेश दिया। वीरभद्र और भद्रकाली को दक्षयज्ञ विध्वंस कर दक्ष द्वितीय का सिर काट दिया। और देवताओं को भी प्रताड़ित किया।*
*फिर प्रजापति ब्रह्मा ने नियमों में संशोधन कर भविष्य में रुद्र को यज्ञभाग देने का नियम बना दिया तब, शंकर जी ने दक्ष द्वितीय को पुनर्जीवित किया। और सहर्ष पार्वती जी को लेकर वापस लौट गए।*
*क्या महाभारत ग्रन्थ गलत है?  यदि शिव पुराण सही है तो महाभारत गलत है। शिव पुराण गलत है।*
*शिवपुराण जो वस्तूतः वायु पुराण की रुद्र संहिता नामक अध्याय है, गलत है।* 
 *क्योंकि वायु पुराण में महाभारत के पश्चात आधुनिक काल की रचना है। वायु पुराण में आधुनिक काल तक के भारत के अधिकांश राजवंशों और राजाओं का इतिहास दिया है। मतलब अत्यधिक नवीनतम रचना है।* अतः 
*वरीयता तो प्राचीन ग्रन्थ महाभारत की ही रहेगी।*
*अतः महाभारत में वर्णित तथ्य ही सही है कि,प्रचेताओं के पुत्र दक्ष द्वितीय की पुत्री सती पार्वती ने दक्ष यज्ञ में आत्मदाह नहीं किया। वे जीवित ही शंकर जी के साथ कैलाश लौटी थी।*
*इसलिए सती की भस्मीभूत देह को लेकर शंकर जी द्वारा विक्षिप्त होकर पूरे भारत वर्ष में भ्रमण करना भी गलत ही है। भगवान विष्णु द्वारा शंकर भगवान के कन्धे पर लटकी सती की भस्मीभूत देह के इक्कावन टूकड़े करना भी गलत है। सती के भस्मीभूत देह के टुकड़े भारत भूमि पर जहाँ- जहाँ गिरे वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ बनना भी गलत है।*
*पौराणिकों ने देवी सती की मृत्यु होना बतला दिया, जबकि शंकर-पार्वती देवता हैं अतः एक मन्वन्तर आयु वाले हैं। अर्थात अमर हैं।*
*यदि सती जलकर भस्म हो गई थी तो उनकी मृत देह कहाँ से आ गई?*
 *पौराणिकों ने भगवान शंकर को विक्षिप्त होना बतला दिया। जबकि वे महान विश विज्ञानी और वितरागी/ वैराग्यवान हैं। उन्हें कैसा शौक और कैसा मोह।*
*पौराणिकों ने भगवान विष्णु द्वारा मृत देह के इक्कावन टूकड़े करने वाला बतला दिया।*
क्या ऐसा पुराण और पौराणिक कथा सही हो सकती है? या केवल सनातन वैदिक धर्म के देवी देवताओं का अपमान करने के उद्देश्य से रची गई बौद्ध रचना है?*
*ध्यान रखें बौद्ध मत की वज्रयान शाखा के तान्त्रिक बौद्धों में ऐसी ही कथा/ कहानियाँ और मठ- मन्दिर पाये जाते हैं। वैदिक धर्म में नहीं।* 

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