मंगलवार, 27 अगस्त 2024

व्रत में तिथि और पूजा का ही महत्व है।

निर्णय सिन्धु के रचयिता आचार्य श्री कमलाकर भट्ट महाभाग का स्पष्ट कथन है कि, *व्रत-पर्व में तिथि और पूजा ये ही मुख्य है।* 
 *न वार, न नक्षत्र न योग केवल तिथि ही मुख्य है।* 
 *ऐसे ही तीर्थ में स्नान मुख्य है।*
*व्रत-पर्व में पूजा ही मुख्य है।*
लङ्घन अर्थात पूरे दिन नहीं खाना- पीना, फलाहारी उपवास, फरयाली उपवास, एक भक्त व्रत अर्थात एक बार दिन में ही खाना, या नक्त व्रत जैसे प्रदोष यानी एक ही बार लेकिन रात में खाना या एकासना अर्थात एक आसन पर बैठकर जितना खाना हो खालो, फिर उठने के बाद नहीं खाना।
ये सब व्रत के अङ्ग हैं व्रत नहीं। लेकिन पूजा मुख्य है।

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