शनिवार, 31 जनवरी 2026

हरि कृपा कैसे होगी?

हम कितने मुर्ख है! इस बात को आरती में स्वीकार भी किया गया है। कि, 
 *मैं मुरख खल कामी। कृपा करो भर्ता।* 
लेकिन वैदिक शास्त्रीय मत स्पष्ट है कि,
भगवान कृपा तब करेंगे जब श्वसन भी सावधानी पूर्वक हो। हर स्वासप्रश्वास पर भी आपका नियन्त्रण हो। इसीलिए सन्ध्या और जप भी प्राणायाम पूर्वक करने का विधान है।
प्राणायाम करने के लिए यम (धर्म) का  सतर्कता पूर्वक नियमित पालन हो।  (अर्थात यम- नियम पालन हो।) फिर दैहिक स्थैर्य और इन्द्रियों पर नियन्त्रण हेतु आसन सिद्ध हो तब प्राणायाम किया जा सकता है।
इसके बाद ही प्रत्याहार द्वारा मन पर नियन्त्रण किया जा सकता है। तब ही सही ढङ्ग से (धारणा-ध्यान-समाधि)अन्तरङ्ग योग सधेगा।
फिर आप यज्ञ में जब इन्दम् इन्द्राय न मम् बोलोगे, तो आपका भाव भी यही रहेगा कि, यह इन्द्र का है, मेरा नहीं।
तब समर्पण बन पाएगा। और हर समय यह ध्यान रह पाएगा कि,न यह जगत मेरा है न मैं इस जगत का हूँ बल्कि यह सब परमात्मा का है, मैं भी केवल परमात्मा का ही हूँ। 
अर्थात पूर्ण समर्पण होगा तब देव (विष्णु) की कृपा होगी।

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