*वैदिक दक्षिणायनान्त दिवस, अर्थात शीतान् के छः मासों की समाप्ति और और उष्णान की छः मासी प्रारम्भ दिवस, वैदिक सहस्य मास प्रारम्भ दिवस, पूरी भूमि पर सबसे छोटा दिन सबसे और बड़ी रात वाला दिन उत्तरी ध्रुव पर मध्यरात्रि, दक्षिण ध्रुव पर मध्याह्न वाला दिन, दसवीं सायन संक्रान्ति जिसे महाभारत काल से उत्तरायण प्रारम्भ दिवस कहा जाने लगा है 21 दिसम्बर 2025 रविवार को रात्रि 08:33 बजे हो चुकी है। जिसे भूमि पर देखा जा सकता है। तो; फिर*
*दिनांक 14 जनवरी 2026 बुधवार को दोपहर 03 बजकर 08 मिनट पर निरयन सौर धनुर्मास समाप्ति अर्थात सूर्य का निरयन धनु राशि से निकलकर कर निरयन मकर राशि में संक्रमण का पर्व या निरयन मकर संक्रमण क्यों कहा जाता है?*
*इस समय ऐसा क्या होता है जिस कारण भारत के आस-पास के लगभग सभी देशों सहित पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है?*
उत्तर --
*निरयन मकर संक्रमण वास्तव में आकाशीय घटना है। सूर्य का परिभ्रमण भूमि जिस मार्ग से करती है उसे क्रान्तिवृत कहते हैं।*
*वेदों में चित्रा तारे को इस क्रान्तिवृत का मध्य बिन्दु अर्थात 180° कहा गया है।*
*क्रान्तिवृत में चित्रा तारे से 180° पर क्रान्तिवृत का प्रारम्भ बिन्दु है। जिसे अश्विन्यादि बिन्दु अर्थात अश्विनी नक्षत्र का प्रारम्भ बिन्दु कहते हैं।*
*क्रान्तिवृत में चित्रा तारे से 180° पर क्रान्तिवृत का प्रारम्भ बिन्दु को वर्तमान में निरयन मेषादि बिन्दु भी कहा जाता है।*
लेकिन *चित्रा तारे से 180° पर अश्विनी नक्षत्र के प्रारम्भ बिन्दु जिसे निरयन मेषादि बिन्दु कहते हैं उस बिन्दु पर वर्तमान में कोई तारा नही है।*
*जिस समय उक्त निरयन मेषादि बिन्दु पर सूर्य और भूमि का 270° का कोण बनता है तो उस घटना को निरयन मकर संक्रमण कहते हैं।*
प्रकारान्तर से
*जिस समय चित्रा तारे पर भूमि और सूर्य के बीच 90° का कोण बनता है उस समय को निरयन मकर संक्रमण कहते हैं।*
*यही घटना दिनांक 14 जनवरी 2026 बुधवार को दोपहर 03 बजकर 08 मिनट पर घटि।*
*आकाश और नक्षत्रों को पहचानने वाले किसान तक इस घटना को देख सकते हैं।*
*देवताओं और स्वर्गादि लोकों को मानने वाले समस्त सनातन धर्मी, जैन, बौद्ध और खालसा सब हर्षोल्लास के साथ सूर्य के निरयन मकर संक्रमण का पर्व मनाते हैं।*
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