महा पुण्यकाल 14 अप्रैल सोमवार को प्रातः 06:08 बजे से 08:15 बजे तक रहेगा। पुण्यकाल 12:27 बजे तक रहेगा।
विक्रम संवत 2082 का प्रारम्भ होगा। जो धार्मिक प्रयोजन और व्यवहार में वैशाखी 14 अप्रैल सोमवार को सूर्योदय से लागू होगा। इन्दौर में सूर्योदय समय 06:08 बजे होगा ।
वैशाखी 14 अप्रैल सोमवार को है।
ब्राह्मण ग्रंथों और श्रोत सूत्र -गृह्य सूत्र ग्रन्थों में चित्रा तारे को भूमि द्वारा सूर्य के परिभ्रमण पथ क्रान्ति व्रत के ठीक मध्य में अर्थात 180° पर माना जाता है। इसलिए चित्रा तारे से 180° पर क्रान्तिवृत और नक्षत्र पट्टी का प्रारम्भ बिन्दु अर्थात अश्विनी नक्षत्र का प्रारम्भ बिन्दु होता है। इसे निरयन मेषादि बिन्दु पर भी कहते हैं।*
निरयन मेष संक्रमण/ वैशाखी (14 अप्रैल) को ऐसा नव वर्ष होगा, जिसे आकाश में देखा जा सकेगा। लेकिन इसे आकाश का नित्य अवलोकन करने वाले किसान आदि और तारों (Star's) को पहचानने वाले खगोल शास्त्री ही समझ पाएंगे।
सूर्योदय के ठीक पहले चित्रा तारा पश्चिम में अस्त हो रहा होगा । और सूर्यास्त के ठीक बाद में चित्रा तारा पूर्व में उदय हो रहा होगा। यही इस नव संवत्सर प्रारम्भ होने की पहचान है।
पञ्जाब हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और नेपाल में जिन दो सूर्योदय के बीच निरयन मेष संक्रमण होता है उसी दिन अर्थात 13 अप्रैल 2025 को सूर्योदय के समय वैशाखी से नव वर्ष मनाते हैं। इसी दिन यहाँ विक्रम संवत 2082 का प्रारम्भ होगा।
बङ्गाल में जिन दो मध्यरात्रियों के बीच निरयन मेष संक्रमण होता है उसके आधार पर नववर्ष प्रारम्भ करते हैं। चुंकि, 13 उपरान्त 14 अप्रैल 2025 रविवार Monday को मध्यरात्रि के बाद मेष संक्रमण होगा इसलिए बङ्गाल में नबा वर्ष पाहेला बोईशाख अगले दिन के भी अगले दिन अर्थात 15 अप्रैल 2025 से प्रारम्भ होगा। बङ्गाल में लोग परस्पर सुभो नोबो बोरशो कह कर बधाई देते हैं।
उड़ीसा में (मध्यरात्रि के बाद निरयन मेष संक्रमण होने के कारण) दुसरे दिन 14 अप्रैल से पणा संक्रान्ति या महा बिशुबा के रूप में नव वर्ष मनाएंगे।
त्रिपुरा में भी निरयन मेष संक्रान्ति से ही नव वर्ष प्रारम्भ होता है।
असम में निरयन मेष संक्रान्ति से ही बिहू या बोहाग बिहू और रोंगोली बिहू नाम से नव वर्ष मनाएंगे। बोहाग बिहु का प्रथम दिन गोरू बिहू कहलाता है।
तमिल नाडु में निरयन मेष संक्रमण सूर्यास्त के बाद होने के कारण 14 अप्रैल 2025 से पथाण्डु के नाम से नव वर्ष मनाएंगे।
पुडुचेरी में भी तमिलनाडु के समान ही निरयन मेष संक्रमण दिवस से ही नव वर्ष मनाते हैं।
केरल में सूर्योदय पश्चात 18 घटि अर्थात 07 घणटे 12 मिनट के बाद निरयन मेष संक्रमण होने से 14 अप्रैल को विषुकानी नाम से नववर्ष मनाएंगे।
इसके अलावा श्रीलङ्का, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, थाईलैंड और सिङ्गापूर में बसे तमिल, मलयाली जन भी निरयन मेष संक्रान्ति से ही नववर्ष प्रारम्भ करते हैं।
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