इस्लाम पन्थ के अनुयाइयों के लिए अलग देश पाकिस्तान की माँग कर पाकिस्तान बनवाने वाले मोहमद अला जिन्ना के दादा प्रेमजी भाई ठक्कर पोरबंदर के पास मोती पानेली गांव के सनातन धर्म के अन्तर्गत लोहाना जाति के थे। प्रेमजीभाई ठक्कर द्वारा वेरावल शहर से मछली का व्यवसाय शुरू करने के कारण लोहाना जाति वालों ने प्रेमजीभाई ठक्कर को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया अर्थात जात बाहर कर दिया।
जिन्ना के पिता पुंजालाल ठक्कर गुजरात के काठियावाड़ में स्थानीय हिंदुओं के विरोध के बाद कराची में रहे थे।
बाद में उन्होंने गुजरात लौटना चाहा, लेकिन लोहाना जाति समाज ने स्वीकार नहीं किया।
इस पर नाराज होकर जिन्ना के दादा प्रेमजीभाई ठक्कर के बेटे अर्थात जिन्ना के पिता पुंजालाल ठक्कर ने आगा खान संप्रदाय का शिया इस्लाम अपना लिया।
इस समय जिन्ना छोटे थे और उनकी स्कूली शिक्षा कराची में ही हुई। जिन्ना का नाम मैट्रिक परीक्षा में एम जेड ठक्कर लिखा हुआ है। दसवीं के बाद में उनके पिता ने धर्म बदलकर जिन्ना का नाम भी बदला गया।
आचार संहिता का पालन करना अच्छा है लेकिन पालन करवाने के लिए दण्डाधिकार किसने दिया? मुझे तो किसी भी ग्रन्थ में नहीं दिखा कि, किसी आचार भ्रष्ट व्यक्ति को जनता दण्ड दे।
समाज ने राज्य और शासक की व्यवस्था इसीलिए की थी। दण्डधिकार केवल राज्य को ही था।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीरामचन्द्र जी ने भी बालि को कहा था कि, तुम अयोध्या सम्राट के क्षेत्र में रहते हो। और मुझे अयोध्या के सम्राट भरत की ओर से अयोध्या साम्राज्य क्षेत्र में होने वाले अपराध का दण्डाधिकार भतत के प्रतिनिधि के रूप में दिया गया है।
इसलिए अनुज वधू के अपराध के दण्ड स्वरूप तुम्हें मृत्यु दण्ड दिया गया।
हमसे तो यहुदी अधिक समझदार थे जिन्होंने यहुदी पन्थ के शब्बत (Shabbat) पर कार्य न करने और सिनेगॉग में जानवर की बलि (Sacrifice) देकर याहवेह को समर्पित करने के लिए सिनेगॉग के वेदी पर जलाया जाता था, जिसे कोरबन (Korban) कहते थे। उसका विरोध करने जैसे कार्यो के लिए क्रूस पर चढ़ा कर मृत्यु दण्ड प्रस्तावित कर रोमन सम्राट टिबेरियस (Tiberius) के अधीन यहुदिया प्रान्त का अधिकारी पोंटियस पिलातुस को सोप दिया। लेकिन यहुदियों ने स्वयम् क्रूस पर नहीं चढ़ाया।
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