सोमवार, 1 दिसंबर 2025

महाभारत युद्ध की मुख्य घटनाओं की तिथि और नक्षत्र।

परम आदरणीय स्व श्री ग.वा. कवीश्वर जी की पुस्तकें  जो आर्काइव पर पढ़ी जा सकती है ---
1 महाभारत के तेरह वर्ष
और
2 महाभारत के गुढ़ रहस्य तथा
3 गीता तत्व मीमांसा
के आधार पर आलेख प्रस्तुत है।

*गीता जयन्ती* अर्थात *युद्धरम्भ के दिन* युद्धारम्म्भ से ठीक पहले श्रीकृष्ण अर्जुन संवाद रूपी श्रीमद्भगवद्गीता प्रवचन की वास्तविक तिथि, नक्षत्र *अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या चित्रा नक्षत्र के दिन है।*

*भीष्म पितामह के शरशय्या पतन अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण तृतीया आर्द्रा नक्षत्र के दिन सायंकाल में हुआ।*

सञ्जय ने भीष्म पितामह के शरशय्या पतन पश्चात कुरुक्षेत्र से हस्तिनापुर जाकर धृतराष्ट्र को जो युद्ध विवरण सुनाया वह महाभारत में भीष्म पर्व कहलाता है। इसी भीष्म पर्व सुनाने के अन्तर्गत *धृतराष्ट्र ने भी सञ्जय के मुख से गीता प्रवचन अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण चतुर्थी, पुनर्वसु नक्षत्र के दिन सुना।*

*अभिमन्यु का वध अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण नवमी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दिन हुआ था।*

*जयद्रथ वध अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण एकादशी, चित्रा नक्षत्र के दिन सायंकाल में हुआ था ।*

*द्रोणाचार्य जी का वध अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण द्वादशी, स्वाती नक्षत्र के दिन हुआ था।*

*कर्ण का वध पौष शुक्ल प्रतिपदा, मूल नक्षत्र के दिन हुआ था।*

*शल्य जी का वध पौष शुक्ल तृतीया, उत्तराषाढा नक्षत्र के दिन मध्याह्न मे हुआ था।*

*बलराम जी की* 42 दिन की *तीर्थ यात्रा पूर्ण* होना,भीम द्वारा *दुर्योधन की जाँघ तोड़ना* ,
*दुर्योधन की मृत्यु* , अश्वत्थामा द्वारा सोते हुए *द्रोपदी के पाँचों पुत्रों की हत्या,* सभी घटनाएँ
*पौष शुक्ल चतुर्थी, श्रवण नक्षत्र को सायंकाल से रात्रि तक में हुई।*
*भीष्म पितामह ने देहत्याग माघ शुक्ल पूर्णिमा को ब्रह्म मुहूर्त या अरुणोदय काल में किया।*

पूर्ण विवरण नीचे दिया जा रहा है।

अज्ञात वास समाप्ति पश्चात पाण्डव विराट राज्य के उपलव्य नगर चले गए। दुर्योधन ने उनका राज्य लौटाने से इन्कार कर दिया। कौरवों और पाण्डवों में युद्ध की तैयारियाँ होने लगी।

इस बीच धृतराष्ट्र ने सञ्जय को दूत बनाकर बिना किसी न्यायोचित प्रस्ताव के पाण्डवों के पास भेजा। कोई समझौता नहीं हो पाया।

फिर पाण्डवों ने अपनी ओर से अन्तिम शान्ति प्रयास करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण को हस्तिनापुर जाने का अनुरोध किया। शरद ऋतु समाप्त हो कर

हेमन्त ऋतु के प्रारम्भ होने को थी तब कार्तिक मास में जब चन्द्रमा रेवती नक्षत्र पर था, उस दिन श्रीकृष्ण ने मैत्र मुहूर्त में एकलव्य नगर से हस्तिनापुर के लिए यात्रा प्रारम्भ की।

अर्थात कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी रेवती नक्षत्र के दिन श्रीकृष्ण ने उपलव्य नगर से प्रयाण किया।

अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की पञ्चमी आर्द्रा नक्षत्र के दिन सायंकाल वृकस्थल पहूँचे, और वृकस्थल में ही रात्रि विश्राम किया।

*षष्ठी, पुनर्वसु नक्षत्र में श्रीकृष्ण हस्तिनापुर में प्रवेश किया। रात्रि विश्राम विदुर जी के घर किया।*

*अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की सप्तमी पुष्य नक्षत्र के दिन धृतराष्ट्र की राज सभा में शान्ति प्रस्ताव रखा‌ और कहा कि, केवल पाँच गांव देदो और शान्ति पूर्वक रहो।लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भूमि देने से इन्कार कर दिया और भगवान श्रीकृष्ण को बन्दी बनाने का प्रयत्न किया। भगवान श्रीकृष्ण तत्काल राजसभा से बाहर निकल गये।*

*फिर विदुर जी के घर से जाते समय कर्ण को समझाने का प्रयास किया लेकिन कर्ण नहीं माना तो भगवान श्रीकृष्ण ने आठवें दिन पश्चात युद्धारम्भ की घोषणा कर दी। जिसे कर्ण ने भीष्ण आदि को बतलाया।*

 *भगवान श्रीकृष्ण ने तुरन्त ही हस्तिनापुर से प्रस्थान कर दिया।*

*उसी दिन सायंकाल में श्रीकृष्ण उपलव्य भी पहूँच गये। पाण्डव सेना ने उपलव्य से प्रस्थान ।*

*अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की सप्तमी पुष्य नक्षत्र के दिन ही बलराम जी की प्रभास क्षेत्र की तीर्थ यात्रा प्रारम्भ हुई।*

*अर्थात अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी पुष्य नक्षत्र के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने आठवें दिन से युद्ध प्रारम्भ करने की घोषणा की।*

*अष्टमी तिथि आश्लेषा नक्षत्र में दोनों सेनाएँ कुरुक्षेत्र पहूँची। और नवमी मघा नक्षत्र से युद्धाभ्यास प्रारम्भ हो गया।*

*चतुर्दशी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दिन कृतवर्मा दुर्योधन से मिले।*

*अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या चित्रा नक्षत्र के दिन युद्धाभ्यास के लिए अन्तिम दिन दोनों सेनाओं के मध्य रथ खड़ा कर श्रीकृष्ण अर्जुन संवाद हुआ जिसे श्रीमद्भगवद्गीता उपदेश कहा जाता है।*

इसके बाद युद्धारम्भ हुआ। प्रत्यक्ष युद्ध का प्रथम दिन रहा। 

मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा विशाख नक्षत्र में प्रथम विश्राम दिवस।

 *अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण पक्ष तृतीया आर्द्रा नक्षत्र प्रत्यक्ष युद्ध का दसवाँ दिन। सायंकाल में भीष्म का शरशय्या पर पतन।* भीष्म का शर शय्या पर प्रथम दिवस।

*अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण पक्ष चतुर्थी पुनर्वसु नक्षत्र दसवाँ विश्राम दिवस। द्रोणाचार्य जी का कौरव सेनापति पद पर अभिषेक। सञ्जय ने हस्तिनापुर पहूँच कर धृतराष्ट्र को अब तक का युद्ध विवरण सुनाया। जिसे महाभारत का भीष्म पर्व कहते हैं। सञ्जय के मुख से धृतराष्ट्र ने श्रीमद्भगवद्गीता प्रवचन सुना।*

*अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्णांक पक्ष नवमी, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रत्यक्ष युद्ध का तेरहवाँ दिन अभिमन्यु वध।*

दशमी हस्त नक्षत्र तेरहवाँ विश्राम दिवस।

*अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण पक्ष एकादशी, चित्रा नक्षत्र प्रत्यक्ष युद्ध का चौदहवाँ दिन जयद्रथ वध, मशालें जलाकर रात्रि में भी बिना विश्राम के युद्ध जारी रहा।*

*अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण पक्ष द्वादशी स्वाती नक्षत्र प्रत्यक्ष युद्ध का पन्द्रवाँ दिवस। द्रोणाचार्य जी का वध।*

*अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त पौष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, विशाखा नक्षत्र, विश्राम दिवस, कौरव सेनापति पद पर कर्ण का अभिषेक, सञ्जय ने हस्तिनापुर जाकर धृतराष्ट्र को युद्ध विवरण सुनाया।*

पौष शुक्ल पक्ष 

*पौष शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा, मूल नक्षत्र, प्रत्यक्ष युद्ध का सत्रहवाँ दिन, कर्ण वध।*

*पौष शुक्ल पक्ष, द्वितीया, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, सत्रहवाँ विश्राम दिवस, कौरव सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक। सञ्जय ने हस्तिनापुर जाकर धृतराष्ट्र को युद्ध विवरण सुनाया।*

*पौष शुक्ल पक्ष, तृतीया, उत्तराषाढा नक्षत्र, प्रत्यक्ष युद्ध का साढ़े सत्रहवाँ दिन, शल्य वध के पश्चात युद्ध विराम।*

*पौष शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, श्रवण नक्षत्र, प्रत्यक्ष युद्ध का अठारहवाँ दिन, बलराम जी के तीर्थ यात्रा के बयालिसवें दिन की समाप्ति । आधा दिन भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध होकर प्रत्यक्ष युद्ध का अठारहवाँ दिन पूर्ण हुआ। अश्वत्थामा द्वारा द्रोपदी के पाँचों पुत्रों की नीन्द में ही हत्या करना, दुर्योधन को तालाब से निकाल कर गदा युद्ध में भीम द्वारा दुर्योधन की जाँघ तोड़कर मरणासन्न करना। भीष्म पितामह की शर शयूपर सत्रहवीं रात्रि।*

पौष शुक्ल पक्ष, पञ्चमी, धनिष्ठा नक्षत्र, दुर्योधन, द्रोपदी पुत्रों की अन्त्येष्टि।शौच पालन मास प्रारम्भ।

*माघ शुक्ल पक्ष चतुर्थी, शतभिषा नक्षत्र, शौच पालन मास समाप्त।*

माघ शुक्ल पक्ष पञ्चमी, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, पाण्डवों का हस्तिनापुर प्रवेश।


*माघ शुक्ल पक्ष षष्ठी, उत्तराभाद्र नक्षत्र से नवमी भरणी नक्षत्र तक युधिष्ठिर का राज्याभिषेक।*

*माघ शुक्ल पक्ष दशमी, कृतिका नक्षत्र, भगवान श्रीकृष्ण और पाण्डवों की भीष्म पितामह से भेंट।*

*माघ शुक्ल पक्ष एकादशी, रोहिणी नक्षत्र से पूर्णिमा, पुष्य नक्षत्र तक शर शय्या से भीष्मोपदेश।*

*माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, पुष्य नक्षत्र , भीष्म पितामह की शर शय्या पर अट्ठावनवीँ रात्रि समाप्ति बेला में उत्तरायण प्रारम्भ होने पर भीष्म पितामह द्वारा देहत्यागा।*


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