शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

परमात्मा का सङ्कल्प ॐ ही वेद है ।

वेदों की कभी रचना नहीं हुई।
क्यों कि, रचना त्वष्टा की ही (शक्ति) है। त्वष्टा और रचना संयुक्त रूप से हिरण्यगर्भ विश्वकर्मा हैं।
इसी कारण कुछ लोगों ने हिरण्यगर्भ ब्रह्मा को वेद वक्ता कहा।
यह सही भी है, सर्वप्रथम वाणी के रूप में वेदों का प्राकट्य हिरण्यगर्भ से ही हुआ। क्यों कि वाणी हिरण्यगर्भ की ही (शक्ति) है।
हिरण्यगर्भ ब्रह्मा ईश्वरीय सामर्थ्यवान देवों में अन्तिम कड़ी है। इसलिए कुछ लोगों ने कहा वेद ईश्वर की रचना है।
फिर स्मृति हुई कि, हिरण्यगर्भ तो अपर ब्रह्म नारायण की नाभि (केन्द्र) से प्रकट हुए। अर्थात हिरण्यगर्भ का मूल तो नारायण (श्रीहरि - कमला) है। तब याद आया कि,
कुछ का मानना है कि, वेद ब्रह्म के निश्वास है। क्योंकि, निश्वास मतलब उत्सर्जन - बाहर निकालना, छोड़ना।
जैसे ब्लेकहोल सब-कुछ निंगल लेता है, तो उससे रेडिएशन उत्सर्जित भी होता है।
ऐसे ही प्राकृतिक प्रलय में सब कुछ ब्रह्म मे समाहित हो जाता है और सृजन के समय ब्रह्म से ही उत्सर्जित होता है तो स्वाभाविक है कि, वेद अर्थात ज्ञान भी ब्रह्म से ही निकलेगा।
लेकिन कुछ लोगों ने जाना कि, वेद स्वयम् ब्रह्म ही है। वेद मन्त्रों को ब्रह्म कहा जाता है।
अर्थात परब्रह्म (विष्णु और माया) परमेश्वर का वेद (ज्ञान) के रूप में प्राकट्य ही ब्रह्म है।
फिर भी कुछ लोगों को सन्तोष नहीं हुआ। उन्होंने कहा नेति-नेति। यही अन्तिम सत्य नहीं है, और भी कुछ है।
पुछा गया कि, फिर क्या है? वेद (ज्ञान) क्या है तो उत्तर मिला वेद शब्द है, शब्द प्रमाण है। और प्रथम शब्द ॐ है। ॐ तरङ्ग है, ॐ नाद है, ॐकार है।
ॐ प्रथम ध्वनि है, प्रथम आकार है, प्रथम ज्ञान है। इसलिए वेदों को बीज रूप में ॐ (प्रणव) कहा जाता है। इस लिए वेदों को ब्रह्म कहते हैं क्योंकि वेद (ज्ञान) का विस्तार होता रहता है।
तो फिर ॐ का मूल क्या है? 
तब उत्तर मिला कि, ॐ संकल्प है, परमात्मा का सङ्कल्प ॐ है। इसी ॐ सङ्कल्प का ही विस्तार यह सब कुछ है। 
इसलिए कहा गया कि, ॐ खं ब्रह्म। ॐ बीज है, ॐ बीज मन्त्र है। यहाँ से/ यहीँ से विस्तार हुआ। 
अतः ॐ अर्थात परमात्मा का सङ्कल्प अर्थात परमात्मा का एक चौथाई भाग (पुरुष सूक्त देखें) ॐ है, जो प्रकट है, शेष तीन चौथाई अप्रकट ही रहता है। 
ॐ है, अर्थात ॐ का अस्तित्व है, अतः कहा गया है कि, ॐ तत् सत। ॐ प्रकाश स्वरूप चेतन तत्व है। उत्पत्ति का बीज ॐ है अतः ॐ आनन्द है। ॐ सच्चिदानन्द है। यही ॐ ज्ञान है। यही ॐ वेद है। ॐ तत्सत्।

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