*3 - स्वायम्भुव मनु का मानव वंश वर्णन*
( प्रजापति ब्रह्माजी की मानस सन्तान ) (1) स्वायम्भुव मनु को उनकी पत्नी ( प्रजापति ब्रह्माजी की मानस सन्तान )शतरुपा से उत्तानपाद और प्रियव्रत दो पुत्र और प्रसूति और आकूति नामक दो कन्याएँ उत्पन्न हुई ।
*उत्तानपाद का वंश वर्णन*
(2) उत्तानपाद - सुनीति से ध्रुव, और सुरुचि से उत्तम ।
(3) ध्रुव के शिष्टि और भव्य ।
(4) भव्य से शम्भु ।
(4) शिष्टि- सुच्छाया से रिपु, रिपुञ्जय,विप्र, वृकल और वृकतेजा ।
(5) रिपु वृहती से चाक्षुष ।
(6) चाक्षुष मनु नड़वला से कुरु, पुरु, शतधुम्न, तपस्वी,सत्यवान, शुचि, अग्निष्टोम, अतिरात्र, सुधुम्न, और अभिमन्यु ।
(7) कुरु - आग्नैयी से अङ्ग, सुमना, ख्याति, अङ्गिरा, और शिबि ।
(8) अङ्ग - सुनीथा से वैन ।
(9) वेन की जांघ के मन्थन से ( विन्ध्याचल के आदिवासी) निषाद । और वैन की दाहिनी भुजा के मन्थन से वैन्य पृथु ।
(10) पृथु से अन्तर्धान और वादी जन्मे।
(11) अन्तर्धानशिखण्डनी से हविर्धान ।
(12) हविर्धान - घीषणी से प्राचीनबर्हि, शुक्र, गय, कृष्ण, बृज और अजिन ।
(13) प्रजापति प्राचीनबर्हि - सुवर्णा से दस प्रचेता।
(14)( प्रचेता गण के यहाँ) कण्डु ऋषि - प्रम्लोचा अप्सरा की सन्तान मारिषा नामक (कन्या) से दक्ष द्वितीय ।
(15) दक्ष (द्वितीय) - असिन्की साठ कन्याएँ जन्मी।
जिनमे सती (शंकर जी पहली पत्नी ) हुई।
उल्लेखनीय है कि, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र दक्ष प्रथम की पत्नी प्रसुति ( जो स्वायम्भुव मनु की पुत्री थी उस प्रसूति ) से चौवीस कन्याएँ जन्मी थी।
इस प्रकार दोनो दक्ष में पन्द्रह पिढियों का अन्तर है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें