परमात्मा की व्यवस्था ऋत के अनुसार चलती है। ऋत को कोई नही बदल सकता ।
ऋत के अनुसार ही सभी देवी- देवताओं और ग्रह नक्षत्रों को चलना होता है।
ऋत के अन्तर्गत ही कर्मफल विधान है। मनसा- वाचा- कर्मणा जैसा कर्म होगा तदनुसार फल सृजन भी तुरन्त ही हो जाता है। लेकिन फलित होने के लिए उपयुक्त देश-काल- वंश- देह सब आवश्यक है, अतः सभी परिस्थितियों के अनुकूल होते ही कर्मफल फल प्रकट हो जाता है।
क्रिया की प्रतिक्रिया, कार्य का परिणाम और कर्म का फल निश्चित है। इसे भी कोई बदल नही सकता। क्रिया की प्रतिक्रिया तत्काल होती है, कार्य का परिणाम तत्काल भी हो सकता है और कुछ समय लेकर भी परिणाम मिल सकता है। जैसे जाँच रिपोर्ट, परीक्षाफल थोड़ा समय लेकर भी मिलते हैं। और जाँच सम्पन्न होना और पढ़ा हुआ याद होना तत्काल परिणाम है।
शास्त्रोक्त कर्म शास्त्रोक्त विधि से लगन, निष्ठा और कुशलता पूर्वक करने पर सफलता निश्चित है।
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