शनिवार, 8 अगस्त 2026

ब्रह्म यज्ञ और देव यज्ञ।

सूर्योदय से कम-से-कम दो घण्टे पहले शय्या त्याग कर शौच स्नान, ब्रह्मयज्ञ अर्थात अष्टाङ्ग योग साधना, सन्ध्या, गायत्री मन्त्र जप, उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर दैनिक अग्निहोत्र करने से सूर्योपासना स्वतः हो जाती है। किसी भी देवता विशेष की स्वतन्त्र आराधना केवल निषिद्ध सकामोपासना में होती है।
अन्यथा सदाचारी जीवन जीते हुए, समत्व भाव धारण कर निश्चयात्मकमिका बुद्धि से चित्त में निरन्तर परमात्मा को ध्यान में बनाये रखते हुए शास्त्रोक्त विधि से ही केवल शास्त्रोक्त कर्म करने वाले योगी का योगक्षेम परमात्मा स्वयम् वहन करते हैं।

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