गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

होलिका दहन के नियम - विधि-निषेध।

1 *फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का उत्तरार्ध अर्थात भद्रा से रहित हो, प्रदोष व्यापिनी हो, तब होलिका दहन करना चाहिए ।*
2 *यदि दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा हो, तब दूसरे दिन ही होलिका दहन करना* चाहिए,कारण यही है कि पहले दिन भद्रा से युक्त होलिका दहन उचित नहीं।

3(क) *यदि दूसरे दिन प्रदोष को पूर्णिमा स्पर्श न करें और पहले दिन प्रदोष में भद्रा हो तथा दूसरे दिन शाकल्यपादिता पूर्णिमा तिथि हो अर्थात साढ़े तीन प्रहर तक अथवा उससे अधिक पूर्णिमा तिथि हो और उससे अगले दिन प्रतिपदा वृद्धि गामिनी हो तो ऐसी स्थिति में दूसरे दिन प्रदोष व्यापिनी प्रतिपदा में ही होलिका दहन होना चाहिए।* 


3 (ख) *यदि दूसरे दिन प्रदोष को पूर्णिमा स्पर्श न करें और पहले दिन प्रदोष में भद्रा हो तथा दूसरे दिन शाकल्यपादिता पूर्णिमा तिथि हो अर्थात साढ़े तीन प्रहर तक अथवा उससे अधिक पूर्णिमा तिथि हो औरयदि प्रतिपदा का ह्रास हो तब पहले दिन भद्रा के पुच्छ काल में अथवा भद्रा के मुख को छोड़कर, भद्रा में ही होलिका दहन किया जाना चाहिए।*

4 *यदि दूसरे दिन प्रदोष को पूर्णिमा स्पर्श न करें और पहले दिन निशिथकाल से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाए तो भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन करना चाहिए, परंतु यदि भद्रा निशीथकाल से बाद में समाप्त हो तो भद्रा के मुख को छोड़कर, भद्रा काल में ही अथवा पुच्छ काल में होलिका दहन करनी चाहिए ।*

5 *श्री विद्याधर शर्मा गौड़ जी ने निर्णय सिंधु के द्वितीय परिच्छेद के फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा निर्णय में कहा..*

*अथ परेन्हि ग्रस्तोदयस्तदा पूर्व दिने भद्रावर्ज रात्रौ चतुर्थयामे विष्टिपुच्छे वा होलिका कार्या...*
अर्थात 
 *यदि दूसरे दिन ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण हो तो पूर्व दिन ही भद्रा के पुच्छ काल में अथवा उस रात्रि के चतुर्थयाम में होलिका दहन करें।*

6 निष्कर्ष-- *(जैसा कि निर्णय सिंधु में श्री विद्याधर शर्मा गौड़ जी ने कहा)*

*अतः पूर्णिमा तिथि के चतुर्थ प्रहर की प्रथम पाँच घटि अर्थात भद्रा के मुख को छोड़कर पुच्छ काल से पूर्व का समय अधम, पुच्छ काल मध्यम तथा चतुर्थयाम सर्वोत्तम काल के रूप में स्वीकार करना चाहिए।*
इसके अलावा यह सत्य  है कि साधारण नियमानुसार ग्रहण काल में होलिका दहन का निषेध नहीं, परन्तु मूर्धन्य विद्वान विद्याधर शर्मा गौड़ जी के वचनानुसार विशेष परिस्थितियों में ग्रहण काल में होलिका दहन से बचना चाहिए।


7 धूलिवन्दन पर्व *धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु तथा अन्य जितने भी ग्रंथ हैं उन सभी में यही प्रमाण प्राप्त होता है कि होलिका विभूति वन्दन/वसंतोत्सव करने हेतु प्रतिपदा, सूर्योदय कालिक होनी चाहिए।*

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