शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

अंग्रेजी लिपि के रोमन अपर केस लेटर्स ABCD, लोअर केस लेटर्स abcd और दोनों प्रकार के कर्स्यु लेटर्स का संक्षिप्त इतिहास।

पत्थरों पर या मिट्टी की प्लेट पर कीलों से खोद-खोदकर लिखने हेतु सरल रेखाओं और अर्धवृत्त को जोड़कर ABCD आदि रोमन / लेटिन स्क्रिप्ट का विकास हरियाणा भारत की ब्राह्मी लिपि --> लेबनान की फोनिशियन लिपि --> पश्चिम टर्की की ग्रीक लिपि --> से लेटिन रोमन लिपि का आविष्कार चौथी शताब्दी में हुआ।
लगभग चौथी से आठवीं सदी के बीच कलम (पेन) से लेखन प्रारम्भ होने के पश्चात लेखन में शीघ्रता हेतु अक्षरों को गोलाई दी देकर छोटे लेटर्स abcd बनाए। छापखाने में लोअर केस में रखे जाने के कारण लोअरकेस भी कहलाते हैं। जबकि रोमन लेटर्स अपर केस कहलाते हैं  क्योंकि ये उपर की ट्रे में रखें जाते थे।

बिना हाथ उठाए आर्मेनियाई आरामी (प्राचीन अरबी) लिपि के अनुसरण में बिना हाथ उठाए हस्त लेखन में तेजी हेतु दोनों प्रकार के कर्स्यु लेटर्स सत्रहवीं - अठारहवीं शताब्दी में रचे गये।
इङ्ग्लेण्ड की मूल भाषा एङ्ग्लो-सेक्शन थी जिसे जर्मनी के प्रभावित इङ्लिश में परिवर्तित किया गया।

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