नक्षत्र और राशियों में ग्रहचार तो घड़ी की सुइयों के समान समय सूचक मात्र हैं। तथा शास्त्रोक्त कर्म शास्त्रोक्त विधि से करने पर देवता प्रसन्न रहते हैं और इससे विपरीत करने पर अप्रसन्न होते हैं। उनकी प्रसन्नता और अप्रसन्नता भी हमारे आचार-विचार-व्यवहार और गुण - कर्म पर ही तो निर्भर है।
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