बुधवार, 27 मई 2026

शान्ताकारम भुजगशयन विष्णु स्तुति।

 


*शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥*

यह श्लोक वेद, ब्राह्मण ग्रन्थों, सूत्र ग्रन्थों में रामायण महाभारत या पुराणों में नहीं मिलता है।
लेकिन महाभारत का अनुशासन पर्व, अध्याय 149 (भीष्म-युधिष्ठिर संवाद) में उल्लेखित विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से पूर्व पढ़ा जाने वाला ध्यान श्लोक के रूप में सर्वप्रिय विष्णु स्तुति है।


 इसमें प्रायः अधिकांश लोग "योगिभिर्ध्यानगम्य्म" का सही उच्चारण नहीं कर पाते हैं
सही उच्चारण के लिए अन्वय करके सीख सकते हैं।
*योगिभिर्ध्यानगम्य्म् ।*
*योगिभिः ध्यान गम्यम्।*
*योगिभि र् ध्यान गम्यम्।*

शान्ताकारम् भुजग शयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्

 विश्वाधारम् गगन सदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम्

 योगिभि र् ध्यान गम्यम्  वन्दे विष्णुम्

 भवभय हरम् सर्वलोक एक नाथम्॥

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