उसके सहयोग हेतु देवताओं के लोक से कोई देवांश भूमि पर उतरते है।
ये पूरा समुह कुछ निर्धारित कार्य पूर्ण करने तक की समयावधि के लिए ही आते हैं और कार्य पूर्ण होने पर वापस अपने लोक में लौट जाते हैं।
इसमें कुछ अपवाद जो मृत्युलोक में ही कुछ कार्य शेष रहने के लिए रुकते भी हैं जैसे कल्कि अवतार को शास्त्रार्थ का शिक्षण प्रशिक्षण के लिए भगवान परशुराम जी अवतार का कार्यभार समाप्त होने पर भगवान श्री रामचन्द्र जी को अवतार का कार्यभार सोप कर स्वयम् तप करते हुए भूमि पर ही रहते हैं। और रुद्रांश हनुमानजी भी भूमि पर ही रह रहे हैं। ये चिरञ्जीवी कहलाते हैं।
जबकि काल के द्वारा कार्य पूर्ण होने का सन्देश देने पर भगवान श्री रामचन्द्र जी, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न तुरन्त साकेत लोक लौट गए। और बाली का ऋण उतारने का अन्तिम शेष कार्य पूर्ण कर जरा के रूप में जन्मे बाली के साधारण सा जहर बुझा तीर एड़ी में लगने पर अपनी लीला संवरण कर गोलोक पधार गये।
भगवान परशुराम और भगवान श्री राम आमने-सामने आने पर नहीं जानते थे कि, परशुरामजी का अवतारत्व वैष्णव धनुष हस्तान्तरण के माध्यम से श्री रामचन्द्र जी में समाहित हो जाएगा। और भगवान परशुराम केवल ऋषि रहकर तप करते हुए कल्कि अवतार को धनुर्वेद का शिक्षण प्रशिक्षण देने तक रुकेंगे।
भागवत पुराण के अनुसार द्वारिका के ब्राह्मण आठ पुत्रों को लेने पश्चिम सागर से होते हुए पाताल में नाग लोक में शेषनाग के महल में विराजमान अष्टभुजा धारी भगवान भूमा के समक्ष उपस्थित होने पर भगवान भूमा नारायण द्वारा बतलाया गया कि, हे कृष्ण तुम पिछले जन्म में नारायण ऋषि थे और अर्जुन नर नामक ऋषि थे। तुम दोनों ने नर नारायण पर्वत पर तप किया था। तुमसे मिलने के लिए इन ब्राह्मण बालकों को लाया गया था। तुम इन्हें लेजाकर ब्राह्मण को सोप दो।
ये सब तथ्य सिद्ध करते हैं कि, भगवान विष्णु और माया को या भगवान प्रभविष्णु और श्री लक्ष्मी को भगवान नारायण और नारायणी को या भगवान श्रीहरि और कमलासना गज सेवित कमला को भूमि पर जन्म नहीं लेना पड़ता है।
सभी अवतार अलग-अलग लोक से आये और वहीं वापस लौटे भी।
धर्म आधारित इसी व्यवस्था को अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार अलग-अलग नाम-रूपों में सभी पन्थों ने अपनाया।
जैनों ने अनीश्वरवादी विचारों के अनुकूल तीर्थंकर कहा। तो, बौद्धों ने भौतिक दृष्टिकोण से बोधिसत्व कहा। और अब्राहमिक मतावलम्बियों ने नबी कहा और खालसा पन्थ ने गुरु कहकर स्वीकारा।
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