शनिवार, 22 जुलाई 2023

वेद विरोधी, नास्तिक, अनीश्वरवादी यक्ष,राक्षसों का पूजक अर्हतों का उपासक जैन सम्प्रदाय।


जैन सम्प्रदाय नाकोड़ा भैरव और भैरवी , मणिभद्र , कुबेर, धरणेन्द्र, घण्टाकर्ण आदि यक्षों - पद्मावती आदि यक्षिणी और राक्षसों की पूजा करने वाला। रावण को अगला तीर्थंकर मानने वाला सम्प्रदाय है।
विष्णु, ब्रह्मा आदि देव और, शंकर, इन्द्र आदि देवताओं को वे उनके तीर्थंकरों के सेवक के रूप में मानते हैं और उनके मन्दिरों में दर्शाते हैं।
तथा जैन सम्प्रदाय उनके सम्प्रदाय के तथाकथित तीर्थंकरों और उनके अनुसार निर्वाण को प्राप्त हो चुके अर्हतों को अपना इष्ट मानता है।
जैन सम्प्रदाय वेद विरोधी अर्थात नास्तिक, अनीश्वरवादी है। उनके अनुसार सृष्टि स्वतः कार्य-कारण वाद के अनुसार अस्तित्व में है। सृष्टि का रचियता कोई ईश्वर या देव नही है। सृष्टि अनादि अनश्वर है।

रजनीश भी मूलतः जैन ही थे।
रजनीश अच्छे अध्येता थे।
जन्मतः रजनीश तरणतारण सम्प्रदाय के जैन थे।
वे जैन आचार्य भी रहे।
मतलब जैन संस्कार उनमें कूट-कूट कर भरे थे।
श्रीकृष्ण के चचेरे भाई नेमीनाथ के समय से जैन सम्प्रदाय अस्तित्व में आया। लेकिन वास्तविक अस्तित्व में जैन सम्प्रदाय पार्श्वनाथ के अनुयाई महावीर स्वामी लाये। इसके पहले जैन सम्प्रदाय का स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं था।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें