शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

भारत की दुरावस्था के दोषी कौन?

दोष  उन सभी लोगों को दे रहा हूँ, जिन्हें चन्द्रवंशियों और नाग वंशियों के महाभारत काल से आज तक के राजा-महाराजा, सामन्तों का जिन्होंने सामुहिक रूप से सीमा पर जाकर  विधर्मी विदेशी आक्रान्ताओ से युद्ध करने, लड़ने भिड़ने के बजाय किले में छुपकर बैठ गये।
जनता लूटती मरती रही और और ये राजा, महाराजा, और उनके सामन्त बिल में छुपकर बैठ रहे।
बाद में साका और जोहर करने के बजाय उन्हें सीमा में घुसने ही नही देने के लिए ईरान और अफगानिस्तान तथा तुर्किस्तान की सीमाओं पर डटे रहना चाहिए था। लेकिन ये अपनी जागीरों/ स्टेट में ही आपस में लड़ते मरते रहे।
और
आक्रमणकारियों की सेना में भर्ती होकर अपने देशवासियों और स्वजाति बन्धुओं (भारतियों) का संहार करने वाले सैनिकों 
और उन देशवासियों का जिन्होंने अपने खेत खलिहान रोन्दते, दुकान - मकान लूटने वाले विदेशी सैनिकों का जरा भी सामुहिक प्रतिरोध नहीं किया।

मैं उन सभी लोगों का विरोध करता हूँ जो;
इन सब लोगों को दोषी ठहराने के बजाय उनकी उक्त मुर्खतापूर्ण कार्रवाइयों का गुणगान करते फिरते हैं और दोष केवल कर्मकाण्डियों, शास्त्रियों और आचार्यों को ही देते हैं। जिनकी रक्षा का भार उक्त निकम्मे डरपोक राजाओं, सामन्तों और सैनिकों का था।

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