कितने ही प्रमाण दे दो कि, रा.स्व.से.संघ युरोपीय अब्राहमिक मत के हित साधन हेतु इटली के फासिस्ट दल के अनुकरण में सावरकर, हेडगऺवार और मुञ्जे ने बहुत सोच समझ कर खड़ी की गई संस्था है।
यह संस्था वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म और भारतवर्ष के विरुद्ध और राजनीतिक विचारधारा में व्यक्तिवाद तथा आर्थिक विचारधारा में पूँजीवाद को भारत में स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई संस्था है।
लेकिन छोटे कार्यकर्ताओं में यह प्रचार किया जाता है कि, संघ का सोच ही राष्ट्रवाद है तथा प्रत्येक भारतीय हिन्दू है चाहे उसका मत, पन्थ, सम्प्रदाय पारसी, यहुदी, ईसाई, इस्लाम, वाहबी आदि अब्राहमिक मत हो या तान्त्रिक, खालसा, जैन, बौद्ध, लिङ्गायत, नाथ पन्थ हो। भारतीय शब्द के स्थान पर हिन्दू और भारतीयता के स्थान पर हिन्दुत्व , व्यक्तिवादी पूंजीवादी फासिस्ट विचारधारा को राष्रवाद नाम देकर केवल भ्रमित कर दिया जाता है।
इस कारण जन सामान्य में भी रा.स्व.से.संघ को सनातन धर्म-संस्कृति और भारत राष्ट्र हितैषी राष्ट्रवादी सङ्गठन ही मानने का भ्रम त्यागना नहीं चाहता है।
दुर्भाग्य से भारत में साम्यवादी विचारधारा नास्तिक के स्थान पर केवल इस्लामी विचार बन कर रह गई। उसके देखा-देखी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सेकुलरिज्म का अर्थ सनातन धर्म का विरोध और ईसाई - मुस्लिमों का तुष्टिकरण मान लिया। यही विचारधारा लोहियावादी समाजवादियों ने भी अपना ली। अंग्रेजों के कट्टर अनुयाई द्रविड़ दलों का एजेंडा शुरुआत से अति सिमीत दृविड़, तमिल पक्ष और उत्तर भारतियों तथा हिन्दी विरोध ही रहा।
परिणाम स्वरूप दयानन्द सरस्वती जी के अनुयाई शुद्ध भारतीय राजनयिक विचारधारा वाले महर्षि दयानन्द सरस्वती, श्रद्धानन्द जी से प्रेरित उस काल के आर्यसमाजी लाला लाजपतराय के अनुयाई सचिंद्रनाथ सान्याल द्वारा अमर बलिदानी खुदीराम बोस जैसे क्रान्तिकारियों से प्रभावित और प्रेरित होकर साम्यवादी भारतीय क्रांतिकारी संगठन -- हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी और पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल, श्री चन्द्रशेखर आजाद, श्री भगतसिंह, श्री राजगुरु, श्री अशफाक उल्ला खाँ जैसे लोगों की हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए)
श्री चन्द्रशेखर आजाद ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ( एचआरए ) का नाम में सोशलिस्टब्द जोड़ कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन कर दिया। 19 दिसम्बर 1927 को पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल जी को गोरखपुर जेल में 27 फरवरी 1931 को चन्द्रशेखर तिवारी "आजाद" को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में और 23 मार्च 1931 को लाहोर जेल में सरदार भगतसिंह जी अमर बलिदान के बाद उक्त राष्ट्रीय आन्दोलन कमजोर हुआ उसके बाद कोई शुद्ध सनातन वैदिक भारतीय विचारधारा वाला राजनीतिक दल नहीं रहा।
इस रिक्त स्थान का लाभ उठाने के लिए अंग्रेजी शासन योजना बना ही रहा था।
इसके बाद अंग्रेजों का चातुर्य देखने और शिक्षा लेने जैसा रहा।
उन्होंने सर सय्यद अहमद और मोहम्मद इकबाल को सनातन धर्मियों के विरुद्ध भड़काया। भीमराव रामोजी सपकाले (अम्बेडकर) को वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म के विरुद्ध भड़काया।
सार्वदेशक हिन्दू सभा ---
लाला लाजपतराय, मदन मोहन मालवीय द्वारा सार्वदेशक हिन्दू सभा सङ्गठन की स्थापना हरिद्वार में 1907 में की।
फिर
राजनितिक दल के रूप में हरिद्वार में सर्वदेशक हिन्दू सभा की स्थापना 1915 लाला लाजपतराय, मदन मोहन मालवीय द्वारा की गई।
सार्वदेशिक हिन्दू सभा के अध्यक्ष ---
1915 से 1921 तक पण्डित मदन मोहन मालवीय सार्वदेशिक हिन्दू सभा के अध्यक्ष थे।
1921 से 1931 तक
लाला लाजपत राय सार्वदेशिक हिन्दू सभा के अध्यक्ष रहे ।
इसके बाद अंग्रेजों का चातुर्य देखने और शिक्षा लेने जैसा रहा। लाला लाजपत राय जैसे शुद्ध सनातन वैदिक वर्णाश्रम धर्म संस्कृति के पोषक कट्टर भारतीय राष्ट्र वादी लाला लाजपत राय के बाद 1931 में बालकृष्ण शिवराम मुञ्जे हिन्दू महासभा के अध्यक्ष बने बन गये।
और अंग्रेज़ो का कुटिल राजनीतिक खेल प्रारम्भ हो गया।
1931 से 1937 तक
बालकृष्ण शिवराम मुञ्जे अध्यक्ष रहे।
उधर हिन्दू सभा के पञ्जाब शाखा के अध्यक्ष भाई परमानन्द त्यागी ने 1933 में मुस्लिमों को अफगानिस्तान भेजने और द्विराष्ट्र सिद्धान्त का स्वीकार करने का लाभ लेने के लिए अंग्रेजी शासन तत्पर होगया।
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा
1937 से 1943 तक अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष विनायक दामोदर सावरकर रहे।
विनायक दामोदर सावरकर ने सार्वदेशिक हिन्दू सभाका नाम हिन्दू महासभा नाम कर के इटली के फासिस्ट दल का अनुयाई बना दिया दिया।
1945 से 1946 तक डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे।
डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में भारतीय जनसङ्घ की स्थापना की और जो 06 अप्रैल 1980 से भारतीय जनता पार्टी कहलाती है।
बालकृष्ण शिवराम मुञ्जे जो सार्वदेशिक हिन्दू सभा के 1931 – 37 तक अध्यक्ष रहे वे केशव बलराम हेडगेवार के राजनीतिक अनुयाई थे। लेकिन उसी समय केशव बलराम हेडगेवार आखिल भारतीय हिन्दू महासभा के उपसभापति रहे।
केशव बलिराम हेडग॑वार के राजनीतिक अनुयाई बालकृष्ण शिवराम मुंजे का योगदान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बनवाने में बहुत अधिक रहा। संघ के संस्थापक और बालकृष्ण शिवराम मुंजे के राजनितिक गुरु डॉक्टर केशव बलिराम हेडग॑वार ने अपने शिष्य बालकृष्ण शिवराम मुञ्जे को इटली के फासिस्ट दल के अनुसार सङ्गठन बनाने का प्रशिक्षण लेने इटली भेजा। जब मुञ्जे दल का सञ्चालन का और शाखा लगाने का
प्रशिक्षण ले कर लौटे तब डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में 27 सितम्बर 1925 ईस्वी में भारत में वैसा ही सङ्गठन राष्ट्रीय स्वयम् सेवक सङ्घ की स्थापना की।
लेकिन
सावरकर की हिन्दू महासभा गांधी जी जैसा जन आन्दोलन खड़ा नहीं कर पाई। यह टीस सावरकर और उसके अनुयायियों को सदैव खलती रहती है। इसलिए विनायक दामोदर सावरकर सदैव से ही गांधी जी का विरोध करते रहे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें