चित्र में माता जी के आगे-आगे दो बालक समान वीर हनुमान जी जैसे और कालभैरव देखे होंगे ये वीर कहलाते हैं; ये ही गाँव के चारों ओर क्षेत्रपाल के रूप में स्थापित किए जाते थे।
अधिकांश गाँवों में केवल खेड़ापति हनुमान ही होते हैं लेकिन जहाँ नाथ सम्प्रदाय का गढ़ और तान्त्रिक अधिक होते हैं, वहाँ भैरव प्रतिमा भी रहती है। जिसमें प्रायः धड़ से ऊपर-ऊपर धड़ और मुख ही होता है।